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Chandigarh Chandigarh नई दिल्ली. पंजाब की तरक्की की मिसाल आज पिछड़ेपन का नमूना बन रही है। दसवीं योजना (2002-07) के आर्थिक विकास के दस्तावेज के आंकड़े यह साबित करते हैं। हरियाणा विकास में उससे कहीं आगे निकल गया है।
हरियाणा का सकल घरेलू उत्पाद जहां 7.6 है वहीं पंजाब महज 4.5 पर ही सिमट गया। अफसोस की बात यह है कि पंजाब से निकले एनआरआई यहां की तरक्की में हाथ बंटाना चाहते हैं लेकिन अफसरशाही अड़ंगा बन गई है।
जीडीपी में फिसड्डी
विकास के मोर्चे पर हरियाणा ने अपने पड़ोसी राज्यों की तुलना में अच्छी प्रगति की है। यहां सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर दसवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 7.6 फीसदी रही, जोकि राष्ट्रीय औसत के बराबर है। हालांकि गुजरात 10.6 फीसदी की विकास दर के साथ सबसे आगे रहा। इस लिहाज से पंजाब का प्रदर्शन खराब रहा।
आर्थिक तौर पर संपन्न माने जाने वाला यह राज्य 4.5 फीसदी विकास दर के साथ सबसे निचले पायदानों में से एक पर है। राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में मंजूर 11वीं पंचवर्षीय योजना के दस्तावेज में कहा गया है कि पांच साल के दौरान पंजाब का प्रदर्शन सिर्फ मध्य प्रदेश से ऊपर है, जिसकी विकास दर 4.3 फीसदी रही।
पंजाब के पड़ोसी राज्यों हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में औसत विकास दर पंजाब से बेहतर रही। हरियाणा की विकास दर 7.6 फीसदी व हिमाचल प्रदेश 7.3 फीसदी रही।
नया लक्ष्य भी पड़ोसियों से बड़ा
11वीं पंचवर्षीय योजना में हरियाणा को 11 फीसदी विकास दर का लक्ष्य मिला है। इस दृष्टि से अपना राज्य तीसरे स्थान पर है। सबसे बड़ा लक्ष्य 12.1 फीसदी का गोवा को और गुजरात के लिए 11.2 फीसदी का लक्ष्य रखा गया है।
नई योजना में भी पंजाब काफी पिछडा है और उसे 5.9 फीसदी की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है। इससे ऊंचा लक्ष्य तो अपेक्षाकृत गरीब राज्यों बिहार 7.6 फीसदी, उड़ीसा 8.8 फीसदी और राजस्थान 7.4 फीसदी है।
50/50 फामरूला फेल
इन्द्रप्रीत सिंह. चंडीगढ़.
पंजाब सरकार ने गांवों की हालत सुधारने के लिए बेशक 50:50 फामरूले के तहत एनआरआई के साथ सहयोग करने की घोषणा कर रखी हो, लेकिन इसका समुचित लाभ लेने कोई पहल नहीं हुई। अफसोस कि पंजाबी एनआरआईज को इस बारे में मालूम ही नहीं है।
डर्बी (इंग्लैंड) के काउंसलर आलोक नाथ से बातचीत में यह खुलासा हुआ। वे इन दिनों पंजाब आए हैं। उनके मुताबिक डर्बी में 17 हजार पंजाबी अपने गांवों का विकास करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें इस योजना के बारे में पता ही नहीं है। ये लोग 20 से 50 लाख तक खर्च करके अपने गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य या जलापूर्ति जैसे कार्र्यो में योगदान देना चाहते हैं।
पर राजनेता, ब्यूरोक्रेट ऐसे लोगों की सुनने को राजी ही नहीं हैं। आलोक नाथ पिछले चार टर्म से काउंसलर हैं और वे डर्बी में मेयर पद के मजबूत दावेदार हैं। आलोक नाथ ने कहा कि पंजाब में 5,6 जनवरी को होने वाला एनआरआई सम्मेलन केवल बड़े-बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट्स को रिझाने के लिए हैं।
त्रस्त हैं ब्यूरोक्रेटिक रवैये से : चालीस साल पहले कर एवं आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार से तंग आकर नौकरी छोड़कर कुछ कर दिखाने की इच्छा लिए डर्बी गए आलोक नाथ का मानना है कि इससे देश अब भी मुक्त नहीं हुआ है।
अधिकारियों को समय की कोई कद्र नहीं है। अपने गांवों के विकास के लिए प्रोजेक्ट लाने वाले एनआरआई को कई-कई दिनों तक लटकाकर रखना इनकी फितरत है। इससे वे त्रस्त हो गए हैं।
घृणा है भ्रूण हत्या से
आलोक नाथ ने बताया कि इंग्लैंड के लोग भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराधों से घृणा करते हैं। डर्बी में लिंग टैस्ट पर पूरी तरह से पाबंदी है।
घर आने की इच्छा
आलोक नाथ की इच्छा है कि वह वर्ष 2011 में अपनी टर्म पूरी कर जीवन की संध्या अपनी मातृभूमि पर गुजारें और यहां के लोगों के लिए कुछ करें।