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मोदी एक तिलिस्म हैं, तोड़ना मुमकिन नहीं!

विशेष टिप्पणी. गुजरात के चुनाव नतीजों का लब्बे-लुबाब यही है कि अगर नरेंद्र मोदी को सत्ता से बाहर करना है तो उसका तरीका भी नरेंद्र मोदी से ही पूछना होगा। पहले यह केवल भ्रम था कि नरेंद्र मोदी पार्टी से ऊपर हो गए हैं। चुनाव परिणामों ने इस भ्रम को हकीकत में बदल दिया है।

पार्टी के सीनियर नेता गुजरात में जीत को लेकर कैमरों की आंखों के सामने जिस तरह के चेहरे तानकर प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं वह श्रीमती इंदिरा गांधी के जमाने की याद दिलाता है। इंदिराजी के पार्टी में बढ़ते वर्चस्व को लेकर अविभाजित कांग्रेस के सीनियर सिपहसालार भी तब तनावपूर्ण मुद्राओं में इसी तरह से प्रतिक्रियाएं व्यक्त करते थे।

नरेंद्र मोदी की भाजपा में वैसी ही छवि प्रचारित की जा रही थी जैसी कि किसी समय श्रीमती इंदिरा गांधी के इर्द-गिर्द स्थापित हो गई थी। इसीलिए केशुभाई सहित पार्टी के प्रमुख बागी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए नरेंद्र मोदी ने इंदिरा गांधी स्टाइल में ही चुनाव परिणाम के दिन तक का इंतजार नहीं किया। मोदी को पता था कि चुनाव परिणाम किस तरह के आने वाले हैं।

वे सत्ता और पार्टी में अपनी जगह को चुनाव परिणाम आने के पहले दिखाना चाहते थे। चुनाव परिणामों को लेकर भ्रम में तो कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल और मीडियाकर्मी थे। ये लोग भी मोदी से इतना खौफ खाए हुए थे कि बंद कमरों में भाजपा के हारने की और जाहिर में सर्वेक्षणों के जरिए नगण्य बहुमत से ही सही मोदी के फिर से सरकार बनाने की घोषणाएं करते फिर रहे थे।

सट्टा बाजार में मोदी की हार को लेकर जिन लोगों ने पैसे लगाए होंगे वे ही इस बारे में ज्यादा ज्ञान प्रकाश कर सकते हैं। मोदी के बारे में एक आम शिकायत है कि वे सभी तरह के मीडिया के प्रति कन्टैम्प्ट की मुद्रा अपनाए हुए रहते हैं।

चुनाव परिणामों ने उसके पीछे के कारणों को उजागर कर दिया है। 1980 के लोकसभा चुनावों के पूर्व हुए सर्वेक्षणों ने जो संभावनाएं व्यक्त की थीं, इंदिरा गांधी ने दो-तिहाई बहुमत प्राप्त कर उनका तब ऐसे ही मखौल उड़ाया था। आश्चर्यजनक यह नहीं है कि वर्ष 2002 के मुकाबले भाजपा को इस बार गुजरात में कुछ सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है।

आश्चर्यजनक यह है कि चौतरफा विरोध (जिसमें कि बागियों का अतिरंजित अहंकार और विपक्ष का निराधार आत्मविश्वास भी शामिल है) के बावजूद मोदी ‘स्वयं’ की छवि के दम पर ‘भाजपा’ की सरकार बनाने में सफल हो गए। अपनी करारी हार के बावजूद कांग्रेस प्रसन्न बने रहने के कारण शायद इस बात में ढूंढ़ सकती है कि गुजरात में वास्तविक जीत तो मोदी की हुई है, एक पार्टी के तौर तो भाजपा कमजोर होकर ही उभरी है।

गुजरात का पूरा ‘स्टेट मैनेजमेंट’ इतना ज्यादा मोदी आधारित हो गया है कि अब अगर स्वयं नरेंद्र मोदी भी चाहें तो अपने बनाए तिलिस्म को वे नहीं तोड़ सकते। मोदी को सत्ता में बनाए रखने में एक पूरी व्यवस्था के स्वार्थ जुड़ गए हैं। इसमें वह जनता भी शामिल है जिसने उन्हें तमाम अनुमानों को लतियाते हुए इतनी सीटें दी हैं।

कांग्रेस की कोशिश तो अब वास्तव में यह होनी चाहिए कि नरेंद्र मोदी के तिलिस्म को गुजरात में ही ज्यादा से ज्यादा कैद कैसे रखा जाए और उसे नई दिल्ली नहीं पहुंचने दिया जाए। बहुत मुमकिन है इस काम में कांग्रेस को मोदी की पार्टी के ही किसी वर्ग का सहयोग भी प्राप्त हो जाए।

कांग्रेस, विपक्षी दलों और ‘विपक्षियों’ के लिए अब अगले पांच साल का एजेंडा नरेंद्र मोदी को हराने या हटाने का नहीं बल्कि उन्हें काबू में रखने का ही हो सकता है। इस बात को ध्यान में रखना बेहद जरूरी होगा कि भाजपा गुजरात का प्रयोग सफलतापूर्वक राजस्थान, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में भी इसी अंदाज में दोहरा सकेगी ऐसा सोच भी खतरों से खाली नहीं है। भाजपा के पास नरेंद्र मोदी केवल एक है और वह भी केवल गुजरात में।





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Pushkar Mishra
Monday, 24th Dec 2007, 11:27
modi ne sidh kar diya hai ki achcha prashasan aur vikash se phir gaddi payee ja sakti hai. Is parinam se congress ko sikh lena chahiye ki dusre dal ke bagi neta ko apnane se chunaw nahi jeeta ja sakta hai, balki apne ranniti prabhshali mudda lekar hi chunaw jeeta jata hai.
Anil Tejawat
Monday, 24th Dec 2007, 12:28
Well done Sh. Modi ji many many congratulations
Amit Sanger
Monday, 24th Dec 2007, 12:46
It was quite expected the victory of Narendra Modi. The people of Gujrat have taken the perfect decision. Narendra Modi must be known as a person with immense will power. he has proved this at several times. and this quality of him had also been identified by the international organisations too, when he build up the earthquake-destroyed Gujrat within less than a year. And as far as the matter of his being a Hindu fundamentalist is concerned, i would like to say that to fight with terrorism and terrorists is quite the demand of time. Congress has no ideology now. leaders of older age are licking the toes of such a younger boy (Rahul Gandhi). they have lost all their self respect. And Sonia Gandhi is a foreigner and she will allways remain a foreigner. i would like to clear that in my opinion the one who is born in a foreign land is not a foreigner but those who are naver wished to learn the language or culture of the nation, are foreigners. She never wanted to learn Hindi. Why? this is her love to India? now she is learning because she'll have to. afterall "kursi jo hathiyaani hai". I love the people of my nation but i hate their illiteracy.
yogesh Kumar
Monday, 24th Dec 2007, 13:44
This is absolutly right. Modi is an important person for the Gujrat. He is one of the execellent man
hari singh solanki(KATHAX
Monday, 24th Dec 2007, 14:53
gujrat ki jith modi ki jith nahi yah jith janata our karyakarta ki himmath par nirbhar karati . modi ko shry dena bhul hogi .parti thah hi uthathi hi jab karykarth ek purn snkalp ke sath musthedi laga rahe .ha ek bath jarur kahunga ki nethr kisi ek ke hath me ho karykarthauska nethev ke bich thalmel jama rahe .karykartha our netha milkar to parti banthe hei jis tharh koi makan me pariwar na rahe tho khali makan makan nahi hotha yah ek dhuri par ek dusare ke purk mane jana hi utham hei