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मलेशिया में हिंदू मंदिरों को मिलेगा संरक्षण

कुआलालंपुर. मलेशियाई सरकार ने देश में हिंदू मंदिरों के संरक्षण की घोषणा की है। इसके तहत सभी हिंदू धर्मस्थलों पर लगातार निगरानी रखकर नियमित अंतराल पर कैबिनेट के समक्ष रिपोर्ट पेश जाएगी।

प्रधानमंत्री अब्दुल्ला बदावी ने यहां सोमवार को लोक निर्माण मंत्री और मलेशियन इंडियन कांग्रेस (एमआईसी) के अध्यक्ष सेमी वेलु को निगरानी करने और रिपोर्ट पेश करने का काम सौंपा है। उन्हें खासतौर पर उन मंदिरों की सूची सौंपने को कहा गया है, जिन्हें किन्हीं कारणों से तोड़ा जा सकता है।

उधर, वेलू ने बताया कि देश में कोई भी मंदिर चाहे वह वैध हो या अवैध, बगैर व्यापक जांच और एमआईसी से विचार विमर्श के नहीं तोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि वे अवैध मंदिरों का पता लगाकर देखेंगे कि उन्हें तोड़ने या कहीं और ले जाने के लिए कोई नोटिस तो जारी नहीं हुआ है।

हिंड्राफ की पहल रंग लाई :
मंदिरों का मुद्दा तब चर्चा में आया जब हिंदू राइट्स एक्शन फ्रंट (हिंड्राफ) ने देश में बड़ी संख्या में हिंदुओं के मंदिर तोड़े जाने का आरोप लगाया था। संगठन ने हिंदुओं को कथित रूप से आर्थिक व शैक्षिक स्तर पर दरकिनार करने का आरोप लगाते हुए भारतवंशियों की विरोध रैली आयोजित की थी। इस पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री के ताजा कदम को हिंदुओं की आहत भावनाओं पर मरहम लगाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। वैसे भारतवंशियों के आंदोलन के बाद से मलेशियाई सरकार का दूसरा कदम है। इससे पहले सरकार 31 भारतवंशियों के खिलाफ दायर हत्या के प्रयास के आरोप वापस ले चुकी है।

वर्जन बाक्स :
विश्वास बहाली की कोशिश‘मैं आपके विश्वास को गलत सिद्ध नहीं करूंगा। मैं सभी जातीय समूहों का सम्मान करता हूं और भारतीयों के साथ भी शत्रु की तरह व्यवहार नहीं करूंगा। हमें एक-दूसरे पर निराधार आरोप नहीं लगाने चाहिए। शिक्षा में सभी को समान अवसर दिए जाएंगे।’

- अब्दुल्ला बदावी, मलेशिया के प्रधानमंत्री (17 दिसंबर को भारतीयों के गुट से मुलाकात के दौरान)





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