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Chhattisgarh
Raipur Raipur कापसी/कांकेर.
जंगल में मिले राकेटनुमा बम से छेड़खानी के दौरान हुए विस्फोट में दो स्कूली बच्चे जान से हाथ धो बैठे। घटना कापसी क्षेत्र के गांव पीवी 35 की है। पुलिस को संदेह है कि यह बम नक्सलियों का हो सकता है।
गांव कापसी से करीब पांच किमी दूर जंगल से सटा है। शुभांकर विश्वास (12) सरस्वती शिशु मंदिर में सातवीं कक्षा में पढ़ता था, जबकि सपन विश्वास (10) गांव की प्राथमिक शाला में पढ़ता था। घूमंतू स्वभाव के ये दोनों बच्चे रविवार शाम जंगल में निकल गए थे। माना जा रहा है कि जंगल में कहीं उनको यह बम हाथ लगा।
उत्सुकतावश ये बच्चे बम को उठाकर गांव के पास खलिहान में बनी झोपड़ी में ले आए और छेड़खानी करने लगे। इसी बीच अचानक बम फट गया। अचानक विस्फोट से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। जोरदार विस्फोट की आवाज सुनकर गांव के लोग बीती रात सहम गए थे। इस बीच पता चला कि गांव के दो बच्चे घर नहीं लौटे हैं।
हिम्मत जुटाकर कुछ लोग उस झोपड़ी तक पहुंचे, जहां से धमाके के आवाज आई थी। वहां का हाल देखकर उनके रोंगटे खड़े हो गए। वहां दो क्षतविक्षत शरीर पड़े हुए थे। कुछ देर बाद बच्चों की शिनाख्त हो गई। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद बच्चों के शव परिजनों के हवाले कर दिए गए। घटना के बाद से गांव के लोग सहमे हुए हैं। पुलिस का दल सोमवार सुबह गांव पहुंचा।
इस शक्तिशाली विस्फोट में झोपड़ी का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। बम से निकले र्छे और धातु के टुकड़े आसपास के पेड़ों में धंसे मिले। थाना प्रभारी सत्यप्रकाश तिवारी और सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट श्री लाल ने बताया कि बम के दो हिस्सों को जांच के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट के पास भेजा जा रहा है।
बम के खोल पर एक नंबर डीए 5 ए 6 04 लाट-109 लिखा हुआ है। इस नंबर के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। जिला पुलिस अधीक्षक रतनलाल डांगी ने बताया कि जांच से बम का स्रोत पता चल पाएगा। उनका अनुमान है कि बड़ी वारदात की तैयारी कर रहे नक्सलियों के पास से यह बम गिर गया होगा,जिसे दुर्भाग्य से बम बच्चों ने उठा लिया।
एसपी का कहना है कि बम का आकार देखते हुए संभावना है कि यह टू इंच मोर्टार या नक्सलियों द्वारा तैयार किया गया देसी राकेट हो सकता है। बीजापुर में कुछ महीने पहले पुलिस ने ऐसे कुछ राकेट जब्त किए थे। लोहे की पाइप से नक्सलियों ने देसी राकेट लांचर तैयार किए हैं।
थाने या मोर्चे की दीवार को फोड़ने के लिए नक्सली इनका इस्तेमाल करते हैं। बम के बचे हिस्से में नंबर होने के बारे में उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की। बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और विधायक विक्रम उसेंडी का कहना है कि पुलिस को जांच करनी चाहिए कि शक्तिशाली बम बच्चों के हाथ कैसे लगा। मृतकों के परिजनों को शीघ्र ही सहायता राशि दी जाएगी।
जगरगुंडा थाने पर हमला
जगदलपुर/दंतेवाड़ा.
चार सौ से ज्यादा हथियारबंद नक्सलियों ने रविवार शाम 7 बजे जिले के जगरगुंडा थाने पर हमला कर दिया। रुक-रुक कर फायरिंग रात 9 बजे तक जारी थी। थाना सलवा जुडू़म राहत शिविर के करीब है। आईजी बस्तर आरके विज ने बताया कि शाम को 7 से 7.30 बजे तक फायरिंग तेज थी।
पुलिस भी नक्सलियों का डटकर मुकाबला कर रही है। फायरिंग में कोई पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ है। आईजी ने बताया कि नक्सली थाने से काफी दूर हैं। रविवार शाम 4 बजे जगरगुंडा से 15 किमी दूर चिंतलनार इलाके में 300 से ज्यादा नक्सलियों को देखे जाने की जानकारी मिली है। इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।