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सांवरलाल और रासासिंह को बदलने होंगे इलाके

अजमेर. राज्य मंत्रिमंडल के ताजे फेरबदल में जल संसाधन मंत्री सांवरलाल जाट खुद को ताकतवर बनाए रखने में कामयाब भले ही हो गए हों, लेकिन परिसीमन के कारण अगले विधानसभा चुनाव में उन्हें नया क्षेत्र तलाशना होगा। जिले के दूसरे मंत्री वासुदेव देवनानी को भी अजमेर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र आरक्षित होने की वजह से नए क्षेत्र की जरूरत पड़ेगी। परिसीमन जाटों के लिए बेहतर साबित हो सकता है। इसका असर रावतों के वर्चस्व पर भी पड़ेगा। जिले के राजनीतिक समीकरण में खासा बदलाव आएगा। जिले में दो के स्थान पर अब केवल एक विधानसभा क्षेत्र आरक्षित रहेगा। विधानसभा क्षेत्र भी आठ ही रह जाएंगे।

- केकड़ी विधानसभा क्षेत्र अब सामान्य हो जाएगा। मौजूदा विधायक गोपाल धोबी को आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकेगा।
- भिनाय विधानसभा क्षेत्र का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। यह चुनाव क्षेत्र केकड़ी, मसूदा व नसीराबाद विधानसभा क्षेत्रों में विभक्त होगा।
- पुष्कर विधानसभा क्षेत्र में किशनगढ़ क्षेत्र की जाट बहुल पंचायतें शामिल होने के कारण सीट जाटों के लिए सुरक्षित हो जाएगी।
- भिनाय में शामिल अरांई पंचायत समिति के जाट बहुल गांव जुड़ने से किशनगढ़ भी जाट नेताओं के लिए मुफीद हो जाएगा।
- मसूदा में भी भिनाय के जाट बहुल गांव शामिल होने से यह सीट भी जाटों के अनुकूल हो जाएगी।
- भिनाय विधानसभा क्षेत्र के गांव शामिल होने से नसीराबाद अब गुर्जरों के मुफीद नहीं रहा। यहां अब गुर्जरों को जाट और रावत चुनौती देने की स्थिति में आ गए हैं।
- ब्यावर विधानसभा क्षेत्र के नवगठित राजसंमद संसदीय क्षेत्र में शामिल होने के कारण रावतों के करीब 40 से 50 हजार वोट अजमेर संसदीय क्षेत्र से कम हो जाएंगे। सांसद रासासिंह रावत को भी नए क्षेत्र की तलाश करनी होगी।
- दूदू विधानसभा क्षेत्र संसदीय क्षेत्र में शामिल होने से जिले की राजनीति जाटों के मुफीद हो जाएगी।
- अजमेर पूरब-पश्चिम क्षेत्र नए परिसीमन में उत्तर-दक्षिण के नाम से जाने जाएंगे। पूरब और पश्चिम क्षेत्र को स्टेशन रोड से रामगंज तक का रोड दो भागों में बांटता था। नए परिसीमन में कई क्षेत्र इधर से उधर हुए हैं। अजमेर दक्षिण क्षेत्र आरक्षित होगा। शिक्षा राज्यमंत्री देवनानी के लिए उत्तर क्षेत्र में मुश्किलें बढ़ जाएंगी।





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