कोटा. नियमित रक्तदान करने वालों के लिए नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (नाको) ने एक नई व्यवस्था दी है। नाको ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं
कि रिपीट डोनर को जरूरत पड़ने पर निजी अथवा राजकीय ब्लड बैंकों से आवश्यकता अनुसार रक्त तत्काल दिलाया जाए।
नाको ने हर तीन माह में रक्तदान करने वालों को इसके लिए परिचय-पत्र भी जारी किए हैं। पूर्व में शिकायत थी कि रिपीट डोनर को भी जरूरत पड़ने पर ब्लड नहीं मिल पाता था या चक्कर काटने पड़ते थे। इन स्थितियों को देखते हुए नाको ने यह व्यवस्था दी है। अब रिपीट डोनर परिचय पत्र दिखाकर तत्काल निजी अथवा राजकीय ब्लड बैंक से रक्त ले सकता है। हालांकि ऐसे रिपीट डोनरों की संख्या स्वैच्छिक रक्तदान करने वालों के मुकाबले काफी कम है।
प्रदेश में स्वैच्छिक रक्तदान में सबसे आगे कोटा में ही रिपीट डोनरों की संख्या बमुश्किल 100 के करीब है। एमबीएस अस्पताल के राजकीय ब्लड बैंक में तो रिपीट डोनरों की संख्या महज 50 ही है।
* नाको की इस व्यवस्था से रिपीट डोनरों को फायदा तो होगा। अक्सर जरूरत पड़ने पर ही वे आते हैं, लिहाजा कार्ड की अहमियत बढ़ जाएगी।’
—डॉ. वेदप्रकाश गुप्ता, राष्ट्रीय अध्यक्ष आईएसबीटीआई
* इस व्यवस्था से कुछ परेशानी हो सकती है। सरकारी ब्लड बैंक में वैसे ही रक्त की कमी होती है। यदि ज्यादातर कार्ड धारक सरकारी ब्लड बैंकों से रक्त लेंगे तो थोड़ी दिक्कत आ सकती है। यदि वे निजी ब्लड बैंकों में जाएंगे तो व्यवस्था कारगर साबित होगी।’
—डॉ. नरेश राय, प्रभारी, राजकीय ब्लड बैंक