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जेल में आधी रात जांच

रायपुर. डीआईजी और एसपी ने कैदखाने की सिक्यूरिटी का पूरा खाका चेक किया। अफसरों ने जेल की चारदीवारी के चारों ओर पैदल गश्त कर सुरक्षा इंतजामों का आंकलन किया। मेन गेट पर तैनात प्रहरियों की राइफल का परीक्षण करने के बाद भीतर मौजूद प्रहरियों के बारे में जानकारी ली।

सूत्रों ने बताया कि डीआईजी और एसपी ने कैदखाने की चारदीवारी के कुछ खास पाइंट पर रोशनी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। खासतौर से जेल के पिछले हिस्से में, जहां से बस स्टैंड की दूरी बमुश्किल 150 मीटर है। वहां गार्ड भी लगाने को कहा गया है।

महिला बंदिनी गृह के पीछे के हिस्से को भी अफसरों ने संवेदनशील माना है। इस हिस्से से जेल की दीवार और एक शासकीय भवन की छत की दूरी अधिक नहीं है। इसी हिस्से में भी खासा अंधेरा था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जेल का यह हिस्सा मुख्य सड़क से 70-80 मीटर ही दूर है। अफसरों ने इस हिस्से में रौशनी के ऐसे इंतजाम करने को कहा, जिससे जेल की दीवार के साथ-साथ परिसर भी जगमगा जाए।

जांच के दौरान जेल कालोनी वाला इलाका भी सूना मिला। अधिकारियों ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिए कि वे कालोनी में रहनेवालों को एलर्ट रखें। जेल विभाग के परिजनों को नसीहत दें कि किसी भी संदेही या अनजान व्यक्ति को यहां देखते ही पुलिस को खबर करें। मंगलवार की रात 8 बजे डीआईजी श्री मरावी पहले सुरक्षा का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने अधीक्षक एसके मिश्रा को बुलाकर उनसे हालात की जानकारी ली और सर्वे किया।

करीब डेढ़ घंटे तक वे जेल और परिसर में मौजूद थे। वे रवाना हो रहे थे तभी एसपी श्री कुमार सिटी एसपी डा. उमेद लाल सिंह, एडिशनल एसपी क्राइम अजातशत्रु बहादुर सिंह के साथ पहुंचे। पुलिस अधीक्षक ने भी करीब पौन घंटे जेल की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया।

राइफलों की र्स्िवसिंग
जेल में नक्सली हमले की आशंका के बाद अफसरों ने शस्त्रागार से रायफल और बंदूके निकलवाकर उनकी र्स्िवसिंग करवा ली है। गोलियां और बारुद का स्टाक भी चेक करके चाकचौबंद कर दिया गया है। जानकार सूत्रों ने बताया कि नए पदस्थ डीआईजी श्री मरावी ने पुलिस विभाग से बारुद और गोलियां मांगी हैं।





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