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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. पूरे प्रदेश में कांकेर जिला ही इस मामले में अपवाद है। कांकेर के सीएमओ आरएस मंडावी पूर्णकालिक मुख्य चिकित्सा अधिकारी हैं। बाकी जिलों में काम चलाऊ अफसरों से काम चलाया जा रहा है। सीएमओ का प्रभार संभालने वाले ज्यादातर अफसर ऐसे हैं जो विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों से न सिर्फ जूनियर हैं, बल्कि उन पर कई तरह के आरोप भी लग चुके हैं।
सीएमओ के पद पर पदस्थ कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं, जिनके खिलाफ विभागीय जांच हो चुकी है। कुछ प्रभारी सीएमओ विवादों में घिरकर निलंबित भी हो चुके हैं। इसके बाद भी उन्हें सीएमओ जैसा महत्वपूर्ण प्रभार सौंपा गया है। रायपुर जिले के सीएमओ की कुर्सी हमेशा से प्रतिष्ठा का मुद्दा रही है।
वर्तमान में सीएमओ पद पर पदस्थ डा. किरण मल्होत्रा भी कई तरह के आरोपों में घिर चुकी हैं। महासमुंद पदस्थापना के दौरान वे निलंबित भी हो चुकी हैं। आंबेडकर अस्पताल में पदस्थापना के दौरान उन्हें सीएम हाऊस में अतिरिक्त सेवाएं देने के लिए अटैच किया गया था। उसके कुछ दिनों बाद वे अचानक सीएमओ बन र्गई। उनकी पदस्थापना को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। दुर्ग जिले में डा. अनिल दवे प्रभारी हैं। उसी आफिस में डा. जय श्री दवे सेवाएं दे रही हैं।
वे पूर्ण कालिक सीएमओ होते हुए भी प्रभारी सीएमओ के मातहत पदस्थ हैं। उन्हें राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान में पदस्थ किया गया था। उन्होंने रायपुर का सीएमओ बनने की इच्छा जाहिर करते हुए वहां ज्वाइनिंग देने से इनकार कर दिया। उनकी वरिष्ठता सूची में बाकायदा इस बात का उल्लेख है। धमतरी जिले में केएस शांडिल्य बेहद जूनियर होने के बाद भी सीएमओ की कुर्सी पर बैठे हैं।
इसी तरह महासमुंद जिले के सीएमओ आरएल धृतलहरे, बस्तर के आरपी पांडे, बिलासपुर के आरआर तिवारी, जाजंगीर चांपा के यूसी शर्मा, अंबिकापुर के अमोल सिंह ठाकुर, कोरिया के शांतिलाल चावड़ा, जशपुर जिले के डा. नंदे, कोरबा के एसके पामभोई, रायगढ़ के जीके सक्सेना, कवर्धा के डा. आरपी नोनहारे और दंतेवाड़ा के जीएस ठाकुर सीएमओ हैं।
इनमें जांजगीर-चांपा, जशपुर, कोरबा, और रायगढ़ जिले के सीएमओ वरिष्ठता सूची में बेहद पीछे हैं। उनसे कई सीनियर अधिकारियों को या तो उन्हीं के मातहत पदस्थ किया गया है अथवा संचालनालय में अटैच कर दिया गया है। बताते हैं कि दंतेवाड़ा के सीएमओ पर गबन तक का आरोप लग चुका है। रायगढ़ जिले के सीएमओ तीन साल तक गायब थे। राज्य बनने के तीन साल बाद वे सेवा में लौटे उसके बाद भी उन्हें यह महत्वूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी गई।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से अभी तक प्रभारी सीएमओ के जरिये कामकाज चलाया जा रहा है। हालांकि कई सीनियर अफसर पात्र होने के बावजूद लुप लाइन में हैं। इनमें डा. शैली पांडे, डा. डीएस सोनवानी के पास तो कोई काम ही नहीं है। डाक्टरों को दो साल की सेवावृद्घि देने के बाद से दोनों खाली हैं।
वरिष्ठता सूची में गोलमाल
स्वास्थ्य विभाग में वरिष्ठता सूची में धांधली कई बार उजागर हो चुकी है। बताते हैं कि वरिष्ठता सूची में अपना नाम ऊपर करवाने के लिए कई बार बाबूओं से मिलकर कुछ अफसर सीनियर अधिकारियों का सीआर गायब करवा चुके हैं।
ऐसी दशा में वरिष्ठता सूची में पहले 10 में आने वाले तीन-चार वरिष्ठ डाक्टरों का प्रमोशन ही लटक गया है। इसी तरह वरिष्ठता सूची में पेंच हेरफेर कर सीनियर अफसरों का नाम नीचे करने के प्रकरण भी सामने आ चुके हैं। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग में बवाल भी मच चुका है।
फिर वही पुराना राग
स्वास्थ्य विभाग प्रभारवाद समाप्त कर पूर्ण कालिक सीएमओ की पदस्थापना करने के मामले में वही पुराना राग अलाप रहा है। सचिव पी. रमेश कुमार का कहना है कि सीनियर अफसरों को सीएमओ प्रमोट करने की प्रकिया चल रही है। इसका रिजल्ट जल्दी सामने आ जाएगा। उन्होंने दावा किया कि विभाग का शीर्ष नेतृत्व महकमें को प्रभारवाद से मुक्त करना चाहता है।