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बकाया चुकाओ नहीं तो खाते सीज

कोटा. वाणिज्यिक कर विभाग ने एंट्री टैक्स नहीं चुकाने वाली व्यापारिक फर्र्मो को कर चुकाने का अंतिम मौका दिया है। विभाग ने फर्म के मालिक या संचालकों की सुनवाई शुरू कर दी है। इसके बाद भी संचालक यदि टैक्स नहीं चुकाते हैं तो उनके खाते सीज करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

वाणिज्यिक कर उपायुक्त (प्रशासन) जमील अहमद कुरैशी ने बताया कि आयुक्त मुकेश शर्मा ने इस मामले में परिपत्र जारी कर दिया है। जिस फर्म को न्यायालय से स्टे मिला है, उसे छोड़कर शेष फर्मों से बकाया एंट्री टैक्स वसूला जाएगा।

कुरैशी ने बताया कि जिन फर्र्मो को बकाया एंट्री टैक्स के नोटिस दिए गए हैं, उनकी सुनवाई अलग-अलग सर्किल में शुरू की जा चुकी है। सुनवाई के लिए फर्म के मालिक अथवा संचालकों को बुलाया जा रहा है। यह उनके लिए अंतिम मौका होगा। इसके बाद भी यदि वे टैक्स जमा नहीं कराते हैं तो उनके खिलाफ डिमांड निकाल कर बैंक खाते सीज करने की कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि 15 ऐसी बड़ी फर्म हैं, जिन पर लाखों रुपए एंट्री टैक्स बकाया है।

उल्लेखनीय है कि विभाग को हर साल 33 करोड़ रुपए एंट्री टैक्स से प्राप्त होते हैं। दिनेश पाउचेज के मामले में हाईकोर्ट ने जब से इस कानून को निष्प्रभावी घोषित किया है, तबसे व्यापारिक फर्र्मो ने टैक्स जमा कराना बंद किया हुआ है।

‘दैनिक भास्कर’ ने 14 दिसंबर को प्रथम पृष्ठ पर ‘एंट्री टैक्स नहीं देने वालों के खाते सीज होंगे’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। विभाग को दिसंबर माह में अब तक करीब 12.50 करोड़ रुपए एंट्री टैक्स मिल चुका है। इसके अलावा करीब 9.50 करोड़ रुपए की वसूली बाकी है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का विभाग ने यह अर्थ लगाया कि जो व्यापारी हाईकोर्ट में गए थे और जिन्हें स्टे मिल गया था। उनसे फिलहाल एंट्री टेक्स की वसूली नहीं होगी, बाकी सभी से वसूली की जाएगी।





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