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बड़ा परिवार, छोटा मकान

रायपुर. home राखी गांव में 350 से ज्यादा परिवार रहते हैं। एनआरडीए केवल 255 परिवारों के लिए मकान बना रहा है अर्थात हर परिवार को मकान नहीं मिल पाएगा। ग्रामीणों को परिवारों की गणना में गहरी आपत्ति है। वे हर परिवार को मकान देने की मांग कर रहे हैं। लेकिन एनआरडीए का कहना है कि परिवारों के सर्वे के आधार पर मकान बनाए जा रहे हैं।

सबको मकान देना संभव नहीं। नई राजधानी में केपिटल कांप्लेक्स राखी गांव में बनेगा। इसके लिए गांव को उजाड़ा जाएगा। इसके बदले में हाउसिंग बोर्ड मकान बना रहा है। इसपर 9.75 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पहले चरण में 150 मकान बन रहे हैं। इनका काफी काम पूरा हो गया।

वहां 105 और मकान बनाने की तैयारी है। राखी के सरपंच कृष्ण कुमार साहू का कहना है कि जब तक हर परिवार को मकान नहीं दिया जाता, तब तक वे जमीन नहीं छोड़ेंगे। इसके बिना किसी के मकान की रजिस्ट्री नहीं होगी।

सबसे बड़ा परिवार
गांव में सबसे बड़ा परिवार जालम चंद्राकर का है। वहां 26 सदस्य हैं। जालम के पांच बेटे हैं। राखी में उनका एक बड़ा घर है, जिसमें एक दर्जन कमरे हैं। उनका पूरा परिवार एक साथ रहता है। चूंकि एक परिवार है, इसलिए एनआरडीए एक मकान देगा, जिसमें दो छोटे-छोटे कमरे होंगे। उनके सामने समस्या है कि वे वहां कैसे रहेंगे। बाबूलाल के डेढ़ दर्जन सदस्यों वाले परिवार को भी एक ही मकान मिलनेवाला है।

दो कमरे में गुजारा कैसे
गांव में ऐसे 50 परिवार हैं जिनके सदस्यों की संख्या 20 से अधिक है। अभी वे कच्चे मकान में रहते हैं। जिसमें कमरों के साथ बड़ा बरामदा और आंगन है। विस्थापित होने के बाद उन्हें छोटे से मकान में गुजारा करना पड़ेगा। इसी तरह 10 से अधिक सदस्यों वाले 100 परिवार हैं। इनके अलावा तकरीबन 150 ऐसे परिवार हैं, जिनमें पांच सदस्य हैं।

मकान के साथ जमीन
एनआरडीए के सीईओ एसएस बजाज का कहना है कि सर्वे के आधार पर 255 परिवारों को मकान दिया जाएगा। ग्रामीणों को किसी तरह की समस्या नहीं होगी। जिनके बड़े परिवार हैं, उन्हें अलग से जमीन भी दी जाएगी। प्रति परिवार के हिसाब से नई राखी में मकान बनाने लगभग 1200 वर्ग फीट जमीन आबंटित की जाएगी। पुराने राखी के मकान, जमीन का मुआवजा भी दिया जाएगा।





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