Breaking News 
bhaskar Web English


HomeNewsRajasthanAjmer Ajmer

‘..कल वो हमारा सहारा बनेगा’

अजमेर. समय के खेल निराले हैं, कल जिस नन्ही जान को किसी ने बोझ मानकर मरने के लिए फेंक दिया था, आज उसी को कोई अपनी जिंदगी का सहारा मान ‘..कल वो हमारा सहारा बनेगा’कर अपना रहा है।

पीसांगन के कालेसर सरसड़ी गांव के पास सात दिसंबर को झाड़ियों में मिले नवजात को ममता की छांव मिलने वाली है। बाल कल्याण समिति की बुधवार को हुई बैठक में मासूम को जिले से बाहर के दंपती को गोद देने का फैसला किया गया। इस दंपती ने बताया, ‘बच्चे को पाल पोसकर उसे अपना वारिस बनाएंगे। पुण्य-पाप का लेखाजोखा बाद में होगा, हमें तो मुंह मांगी मुराद मिल गई है।’

जिले के बाहर से आए यह दंपती बच्च गोद लेने की चाह जयपुर, कोटा, अलवर सहित कई स्थानों के चक्कर लगा चुका था। उनकी तलाश सालों से जारी थी। महिला ने रोते हुए कहा,हम बच्चे को सहारा नहीं दे रहे हैं, बल्कि यह बच्च हमारा सहारा बनेगा।

25 ने किया था आवेदन
बाल कल्याण समिति की बुधवार को हुई बैठक में बच्चे को गोद लेने के लिए पांच दंपती पहुंचे थे, हालांकि आवेदन 25 ने किया था। समिति की अध्यक्ष विद्या कमलाकर जोशी ने बताया कि बुधवार को बैठक में जिले से चार दंपती आए थे। बाहर से आया बैंककर्मी और उसकी पत्नी दूसरी बार बैठक में पहुंचे थे।

जांच परख कर फैसला
बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष विद्या कमलाकर जोशी ने बताया कि बुधवार को पांचों दंपतियों का साक्षात्कार लिया गया और गृह अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर अजमेर के बाहर से आए दंपती को बच्च गोद देने का निर्णय लिया गया। हालांकि समिति के पांच सदस्यों में से एक ललित देवानी जयपुर गए हुए थे।

जोशी ने बताया कि फोन पर उनकी सहमति मिलते ही अजमेर से बाहर के दंपती को बच्च गोद दे दिया गया। बच्चे को गोद लेने के लिए 25 आवेदन आए थे। इससे पूर्व 20 दिसंबर को हुई बाल कल्याण समिति की बैठक में कुछ नए आवेदनों पर गृह अध्ययन रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया टल गई थी।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: