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भोपाल. राजधानी के बीचोंबीच स्थित टीटी नगर दशहरा मैदान गैस सिलेंडरों की अवैध मंडी बन चुका है। शासन प्रशासन यह जानकर भी अनजान बना हुआ है कि यह अवैध मंडी किसी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकती है। सुबह सात बजे से दस बजे तक यहां गैस सिलेंडर लेने वालों की कतारें लगी रहती हैं। दिन में भी यहां सिलेंडर लेने वालों की आवाजाही बनी रहती है।
भास्कर के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार दशहरा मैदान पर केवल एक ही डीलर का वैध लायसेंस हैं, शेष डीलर वहां अवैध रूप से सिलेंडर का व्यवसाय कर रहे हैं। इस स्थिति का चिंताजनक पहलू यह है कि दशहरा मैदान पर साल भर कोई न कोई आयोजन चलता रहता है।
राजनीतिक दलों की रैलियों और सभाओं के अलावा कई मेले यहां लगते हैं। इन आयोजनों में भारी भीड़ जुटती है। यदि दुर्भाग्यवश कोई घटना हो गई तो उसकी भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
घर पर नहीं पहुंचता सिलेंडर
राजधानी में रोजाना आठ हजार से अधिक सिलेंडर वितरित होते हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश घर पर नहीं पहुंचते। सिलेंडर लेने के लिए डीलर के शो रूम व गो डाउन पर चक्कर काटना पड़ता है। शाहपुरा और कोलार रोड जैसे दूरस्थ इलाकों में कंपनियों ने अवैध डिलेवरी प्वाइंट बना रखे हैं। पुराने शहर में सेंट्रल लायब्रेरी मैदान पर भी ऐसा ही डिलेवरी प्वाइंट बना हुआ है।
कागजात के नाम पर परेशान करते हैं डीलर
एलपीजी उपभोक्ताओं की आम शिकायत है कि डीलर उन्हें कागजातों के नाम पर परेशान करते हैं। पच्चीस से तीस साल पुराने गैस कनेक्शन के कागजात संभाल कर रखना आसान नहीं है। बड़ी संख्या में ऐसे मामले भी हैं, जिनमें परिवार के मुखिया, जिनके नाम गैस कनेक्शन था, उनकी मृत्यु हो चुकी है। कनेक्शन के ट्रांसफर या अन्य जरूरतों के लिए वे उनके हस्ताक्षर कहां से लाएं?
संचालकों की अपनी राय
गैस एजेंसी संचालकों की मानें तो दशहरा मैदान पर सिलेंडर लेने आने वाले अधिकतर ऐसे लोग होते हैं, जिनके पास वैध कनेक्शन नहीं होता। एक एजेंसी संचालक के अनुसार ये लोग ऐसे उपभोक्ताओं से कागजात जुटा लेते हैं, जिन्हें सिलेंडर की अधिक जरूरत नहीं होती। इनके नाम पर हर 21 दिन में सिलेंडर लेकर उसे ब्लैक में बेच देते हैं।
आठ रुपए कम लेना चाहिए: यदि किसी वजह से उपभोक्ता एजेंसी के गो डाउन से सिलेंडर ले जाए, तो उसके बिल में आठ रुपए की कटौती करना चाहिए, लेकिन किसी भी एजेंसी पर इस नियम का पालन नहीं हो रहा।
फोन पर बुक न करने की शिकायत: कोटरा सुल्तानाबाद में रहने वाले एसके त्रिपाठी ने शिकायत की कि डीलर फोन पर सिलेंडर बुक नहीं करता। कर्मचारी रिसीवर उठा कर रख देते हैं और शिकायत करने जाओ तो मालिक एजेंसी पर मिलते नहीं।
>> हम इसकी जांच कराएंगे कि आखिर सभी डीलरों के गोडाउन एक जगह कैसे बन गए? यह खतरनाक हो सकता है।
- हरेंद्र सिंह, जिला खाद्य अधिकारी
>> यदि डीलरों को गो डाउन का लायसेंस दिया गया है, तो सभी औपचारिकताएं पूरी की गईं होंगी। इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं होती।
-संजय गुप्ता, असिस्टेंट मैनेजर,इंडियन आयल
>> डीलरों को गो डाउन से सिलेंडर के वितरण पर प्रतिबंध लगाया गया है। यदि गो डाउन से ग्राहकों को सीधे सिलेंडर दिए जा रहे हैं, तो यह गलत है।
- मनोज कुमार, सेल्स मैनेजर, एचपीसीएल
>> सभी डीलरों को वैध लायसेंस लेकर व्यवसाय करना चाहिए। वैध लायसेंस होने से सुरक्षा के न्यूनतम मापदंडों का पालन भी हो सकेगा।
- आरके गुप्ता, प्रोपरायटर, आरके डिस्ट्रीब्यूटर