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जोधपुर. जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 26 पद रिक्त होने और संविदा चिकित्सकों को गांव रास नहीं आने से ग्रामीण मरीजों के लिए नीम हकीम और झाड़ फूंक से
इलाज कराना मजबूरी बन गई है।
नीम हकीमों से 10 से 40 रुपए में घर बैठे इलाज करवाने की सुविधा के आदी हो चुके देहात के रोगियों ं को सरकारी अस्पतालों की राह दिखाने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। कुछ अस्पतालों में डॉक्टर है भी तो उनकी फीस 50 रुपए और फिर दवाएं लेना लोगों को रास नहीं आ रहा है। इस कारण गांवों में फर्जी डॉक्टरों का जाल मजबूत होता जा रहा है।
जिले में ब्लॉक सीएमओ स्तर के अस्पताल बालेसर, बनाड़, भोपालगढ़, ओसियां, फलौदी, पीपाड़सिटी, सालावास, सोमेसर (शेरगढ़) में हैं। इनके आसपास के अस्पताल भी ब्लॉक सीएमओ के अधीन हैं। इन 9 अस्पतालों में 26 विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त हैं।
* रिक्त पद भरने के लिए संविदा पर चिकित्सक रखे जा रहे हैं, लेकिन वे गांवों में टिकने की बजाय अच्छी ऑफर मिलने पर छोड़कर चले जाते हैं। पद फिर रिक्त हो जाता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
— डॉ. प्रेमलता माथुर, सीएमएचओ
क्या हो रहा है असर
* जेएस गाइनी के पद रिक्त होने के कारण आज भी गांवों में अप्रशिक्षित दाई डिलीवरी करवा रही है।
* देहाती सरकारी अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों की डेली अप डाउन की प्रवृत्ति से ग्रामीणों को रात के समय नीम हकीम की शरण लेनी पड़ती है। तत्काल चिकित्सा सेवा मिलने से गांव के लोगों की नीम हकीमों के प्रति सहानुभूति रहती है।
* औषधि नियंत्रण विभाग की ओर से नीम हकीमों के अवैध दवा व चिकित्सा के व्यापार पर अंकुश नहीं लगा पाने से इनपर नकेल नहीं ंकसी जा रही है। सरकारी मेडिकल आफिसर को नीम हकीमों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं करने से उनके हौसले बुलंद हैं। ऐसे में देहात के मरीज नीम हकीमों में चंगुल से निकल नहीं पा रहे हैं।
* सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं और दवाओं का टोटा होने से भी मरीज इनसे मुंह मोड़ने लगे हैं।
कहां कितने पद रिक्त
सेंटर - पद
बालेसर- 2
ओसियां- 4
फलौदी- 3
बाप- 3
बिलाड़ा- 2
पीपाड़- 2
भोपालगढ़- 2
सालावास- 1
शेरगढ- 2
बनाड़- 2
तेना- 1