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भोपाल. परिसीमन आयोग के अध्यक्ष जस्टिस कुलदीप सिंह के इस बयान ने प्रदेश में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है कि यदि सरकार अगले साल जनवरी में अधिसूचना जारी कर दे, तो फरवरी के बाद होने वाले सभी चुनाव नए परिसीमन के आधार पर होंगे।
मप्र विधानसभा के चुनाव चूंकि नवंबर में प्रस्तावित हैं, इसलिए यहां चुनाव नए परिसीमन के आधार पर हो सकते हैं। हालांकि यह तभी संभव होगा जब केंद्र सरकार जनवरी माह तक अधिसूचना जारी करे और ऐसा इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि संप्रग के अधिकांश घटक दल नहीं चाहते कि अगले चुनाव से पहले कोई पंगा हो।
मप्र की 230 विधानसभा और 29 लोकसभा सीटों के परिसीमन का काम मई में ही निबट गया था। मई में सौंपी गई रिपोर्ट से सीटों की संख्या में तो कोई फेरबदल नहीं हुआ। अलबत्ता सामाजिक व राजनीतिक तासीर बदलने की कोशिश जरूर की गई। शिवराज सरकार के अनेक मंत्रियों समेत कई दिग्गज विधायक परिसीमन की चपेट में आ रहे हैं।
नेताओं को अब तक भरोसा था कि नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में उनके निर्वाचन क्षेत्र जस के तस बने रहेंगे, लेकिन जस्टिस कुलदीप सिंह के बयान के बाद उनका ध्यान वैकल्पिक विधानसभा सीटों की तरफ भी जाने लगा है।
कई विधायकों के लिए संकट
मप्र उन राज्यों में शामिल है, जहां परिसीमन के बाद आरक्षित वर्ग की सीटें बढ़ रही हैं। वर्तमान में अनुसूचित जाति वर्ग की 34 और जनजाति वर्ग की 41 सीटें हैं। परिसीमन के बाद ये क्रमश: 35 और 47 हो जाएंगी। इसके अलावा कुछ सीटें, जो फिलहाल सुरक्षित हैं, वे सामान्य वर्ग की हो जाएंगी। इस उलटफेर से आधा दर्जन से ज्यादा मंत्री और एक दर्जन से ज्यादा विधायकों के सामने संकट खड़ा होना तय है।
मंत्री, जिनकी सीटों पर असर पड़ेगा
नरोत्तम मिश्रा, मंत्री, स्थानीय शासन, मिश्रा की डबरा सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हो रही है। वे ग्वालियर जिले में बन रही दो सीटों ग्वालियर ग्रामीण व भीतरवार में से एक पर दावेदारी कर सकते हैं। हालांकि ग्रामीण पर विधायक ध्यानेंद्र सिंह की दावेदारी भी हो सकती है।
अजय विश्नोई, मंत्री, स्वास्थ्य
विश्नोई कीमंझौली सीट भी परिसीमन की भेंट चढ़ रही है। अगले विधानसभा चुनाव में उन्हें जबलपुर जिले की ही किसी दूसरी सीट में अपने लिए संभावना देखनी पड़ेगी। मझौली सीट का एक बड़ा हिस्सा पाटन विधानसभा में जोड़ दिया गया है।
मोती कश्यप, राज्यमंत्री
जबलपुर जिले के ही मोती कश्यप की पनागर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति से सामान्य श्रेणी की हो रही है। वे सिहोरा में शिफ्ट हो सकते हैं, जो सामान्य से सुरक्षित हो रही है। फिलहाल उन्हें नई जगह की तलाश है
जगदीश देवड़ा, मंत्री, श्रम
देवड़ा को अपने लिए नई सीट तलाशनी होगी। वे मंदसौर जिले की सुरक्षित सुवासरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते हैं। जो सामान्य हो रही है। परिसीमन के आधार पर चुनाव होने की सूरत में श्री देवड़ा को नई बन रही सीट मल्हारगढ़ शिफ्ट होना पड़ सकता है।
मीना सिंह, राज्य मंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास
सुश्री सिंह की नौरोजाबाद सीट भी गायब हो रही है। उन्हें उमरिया जिले में नए ठिकाने की तलाश करनी होगी। जिसके लिए उन्हें राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला करना होगा। जिसके चलते उनके लिए नई सीट की तलाश फिलहाल आसान प्रतीत नहीं हो रही।
गंगाराम पटेल, राज्य मंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी
दमोह जिले के गंगाराम पटेल को भी अपनी हटा सीट से हटना पड़ेगा। परिसीमन में यह सीट सुरक्षित हो रही है। इसके बावजूद श्री पटेल के लिए खुशी की बात यह हो सकती है कि जिले की पथरिया सीट अब सामान्य हो रही है।
प्रभावित हो रहे विधायक
सुनील नायक, विजय बहादुरसिंह बुंदेला, सरोज बच्चन नायक, अजरुन पालिया, अर्चना चिटनीस, गिरिजा शंकर शर्मा, दीपक जोशी, राजनारायण सिंह पुरणी, हुकुमचंद यादव, रसाल सिंह, लवकेश सिंह, पंचूलाल प्रजापति, सोना बाई, धरमू राय ,भक्तपाल सिंह आदि को भी परिसीमन लागू होने की सूरत में आगामी चुनाव के लिए अपने-अपने नए राजनीतिक आशियाने तलाशने होंगे।