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भोपाल.
इसे संबंध बनाए रखने की विवशता कहा जाए या जागरूकता का अभाव? आज के जमाने में भी ऐसी महिलाओं की कमी नहीं है जो घरेलू हिंसा की शिकार हैं। बावजूद उनका पुलिस से आग्रह रहता है कि रिपोर्ट लिखने की बजाय पति को समझा दिया जाए।
क्रूरतम हिंसा की शिकार महिलाओं में ऐसी भी हैं जिनकी छाती पर पति ने ब्लेड से अपना नाम लिख दिया या जिन्हें अपने दुधमुंहे बच्चे से अलग कर दिया गया। ऐसी भी जिन्हें जबरदस्त पिटाई के बाद अनजाने शहर के होटल में अकेला छोड़ दिया गया।
पुलिस परेशान है और महिला थाने में नियुक्त
काउंसलर चिंतित, कि वे क्या करें। हर रोज उनके पास 20 से लेकर 25 शिकायतें आती हैं। घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं की इच्छा यही रहती है कि पति को समझाइश दे दी जाए। वह समझ जाए और घर दोबारा बस जाए।
भास्कर ने पुलिस और काउंसलर्स से बात की। इसमें ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता जैसे दावों की सच्चई पर सवालिया निशान लगा दिए।
छाती पर लिखा नाम: काउंसलर मोहेब अहमद बताती हैं कि पिछले महीने पुराने शहर की एक युवती थाने आई। वह दर्द से कराह रही थी। उसने बताया कि पति जो प्राइवेट नौकरी करता है, उस पर शक करता है।
वजह यह है कि उसे सिर्फ यह पता चला था कि उसकी सगाई होने के बाद टूट गई थी। इसको लेकर पति ने पत्नी के सीने पर रेजर से अपना नाम लिख दिया। महिला चाहती थी कि पति पर कार्रवाई नहीं हो, उसे समझा दिया जाए।
इंजीनियर भी पीछे नहीं
ऐसे मामलों में कुलीन वर्ग के लोग भी पीछे नहीं हैं। मोनिका (काल्पनिक नाम) भोपाल के सेंट जोसफ कोएड स्कूल से पढ़ने के बाद पिता के साथ आगरा में बस गई थीं। साफ्टवेयर इंजीनियर बनने के बाद उनकी शादी दो महीने पहले दिल्ली में नौकरी कर रहे एक साफ्टवेयर इंजीनियर से हुई। दोनों हनीमून मनाने गोवा गए थे। वहां पति किसी बात पर बिफरा, पत्नी को मारा-पीटा और रात तीन बजे होटल में अकेला छोड़ कर भाग निकला।
मोनिका के पास एटीएम कार्ड था, वह होटल का बिल चुका कर पिता के घर आगरा जा रही थी। किसी ने ट्रेन में सलाह दी कि वह भोपाल में शिकायत दर्ज करा दे। उसकी शिकायत लेकर पुलिस ने आगरा जाने की सलाह दी। आगरा में मोनिका को उसके भाई ने अपने घर में नहीं आने दिया। माता-पिता का भी कहना था कि वह पति से समझौता कर ले।
काश अंजू रिपोर्ट लिखा देती
सब इंसपेक्टर योगिता साटनकर इस बात को याद कर सिहर उठती है। अशोका गार्डन में रहने वाली अंजू को उसका पति आए दिन मारता-पीटता था। वह रिपोर्ट लिखाने तैयार नहीं थी। रक्षाबंधन के पहले दोनों में समझौता हुआ कि अंजू राखी मनाने के बाद ससुराल में रहेगी। लेकिन उसका पति उसे पहले ही ले आया। उसने गुजरात ले जाते वक्त अंजू को ट्रेन से धक्का दे दिया। वह वहीं नौकरी करता था। अब इस हत्या के मामले को गुजरात पुलिस देख रही है।
25 दिन के बच्चे को मां से छीना
एसआई योगिता बताती हैं कि यह मामला दो दिन पुराना है। दानिश नगर में रहने वाली सीमा (काल्पनिक नाम) एक मोबाइल नेटवर्क कंपनी में काम करती थी। यहीं उसकी मुलाकात एक युवक से हुई, दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया। 25 दिन पहले सीमा ने एक बच्चे को जन्म दिया। पति सुभाष नगर में रहता है।
इन दोनों के बीच अनबन चल रही थी। सीमा मायके जा नहीं सकती। वह किराए के मकान में रहती है। सोमवार को उसका पति दानिश नगर गया और 25 दिन के बच्चे को अपने घर ले आया। वह बच्च लौटाना नहीं चाहता था। पुलिस ने मंगलवार की रात बच्च तो सीमा को दिलवा दिया, लेकिन सीमा पति के खिलाफ एफआईआर नहीं चाहतीं।
कुंठा है प्रमुख कारण
>> समाज में महिला को कमजोर मानने की प्रवृत्ति बहुत ज्यादा है। अधिकांश लोग भागमभाग की जिंदगी में अपनी बाहर की कुंठा पत्नी पर निकालते हैं। वे ऐसा किसी अन्य के साथ नहीं कर सकते। महिला को अशक्त मानने का सामाजिक कारण भी है।
डा. शबाना खान साइकोलाजिस्ट गांधी मेडिकल कालेज