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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. नए परिसीमन के बाद जिले में बच रही नौ विधानसभा में से कांग्रेस और भाजपा के खाते की एक-एक सीट कम हो रही है। भाजपा के कब्जे वाली सीपत सीट बिलासपुर शहर (बेलतरा) बन रही है, वहीं जरहागांव सीट खत्म करके इसे लोरमी और मुंगेली में शामिल कर दिया जाएगा।
इससे दोनों ही क्षेत्रों के विधायकों को दावेदारी के लिए नए क्षेत्रों में मशक्कत करनी पड़ेगी। वहीं बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र को सामान्य करने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों को पार्टी में नए उम्मीदवारी तलाशनी पड़ेगी। वहीं सामान्य सीट होने के बाद बिलासपुर क्षेत्र से दोनों ही पार्टियों में स्वाभाविक तौर पर दावेदारों की संख्या बढ़ेगी।
परिसीमन आयोग की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार को इसे लागू करना भर बाकी रह गया है। नए परिसीमन के अनुसार बिलासपुर जिले में नौ और बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र में आठ विधानसभा क्षेत्र बच रहे हैं। इसकी वजह है कि नए परिसीमन के आधार पर मरवाही विधानसभा सीट प्रस्तावित नए कोरबा (सामान्य) लोकसभा क्षेत्र में शामिल हो जाएगी।
प्रस्तावित नए परिसीमन के अनुसार मरवाही (अनुसूचित जाति) सीट में पेंड्रा और पेंड्रारोड के बड़े हिस्से सहित मेडुका, कोरजा, नेवसा, लालपुर गौरेला पटवारी हलका शामिल होंगे। इसी तरह से कोटा क्षेत्र में गौरेला और रतनपुर के कुछ हिस्से जोड़े जा रहे हैं।
जरहागांव विधानसभा सीट को खत्म करके लोरमी और मुंगेली विधानसभा क्षेत्र में बांट दिया गया है। इसी तरह बिल्हा क्षेत्र में मुंगेली, पथरिया के साथ ही और बिलासपुर के कुछ हिस्सों को भी शामिल किया जाएगा। इसमें तिफरा सहित शहरी इलाके के वार्ड नंबर 39, 54 और वार्ड क्रमांक 55 शामिल किए जाएंगे।
सीपत विधानसभा क्षेत्र को समाप्त कर बनाए गए बिलासपुर ग्रामीण (बेलतरा) विधानसभा क्षेत्र में कोटा और रतनपुर तहसील के इलाके शामिल किए जा रहे हैं। इनमें ग्राम बेलतरा, रानीगांव, जोठी, जाली आदि पटवारी सर्किल प्रमुख हैं। इसके अलावा बेलतरा, भरारी, पेंडरवा, लोफंदी, सोंठी, सेंदरी, कोनी, बैमा, मोपका, मंगला, फदहाखार, जूना बिलासपुर और अरपापार के वार्ड क्रमांक 40, 41, 42 और 43 शामिल हैं।
सीपत का आधा हिस्सा मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में शामिल किया जा रहा है। शहर से लगा हुआ देवरीखुर्द पूर्ववत मस्तूरी विधानसभा क्षेत्रा का हिस्सा रहेगा। विधायकों को तलाशने पड़ेंगे नए क्षेत्र: नए परिसीमन के अनुसार सिर्फ कोटा सीट के आरक्षण में परिवर्तन किया जा रहा है। इस अनुसार कोटा सीट जनरल की जगह अब आदिवासी के लिए आरक्षित होगी।
इससे यहां पर वर्तमान विधायक रेणु जोगी को अगले चुनाव में दावेदारी के लिए मशक्कत करनी पड़ सकती हैं, क्योंकि वर्तमान में वे सामान्य सीट के कारण क्रिश्यिन होने के आधार पर चुनाव लड़ी हैं। वहीं भाजपा को भी यहां के लिए आदिवासी प्रत्याशी तलाशना पड़ेगा। सीपत विधानसभा क्षेत्र खत्म होने के बाद भाजपा विधायक बद्रीधर दीवान के लिए मुश्किल हो सकती है। वे लगातार सीपत क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और यहीं से दावेदारी करते रहे हैं।
इसके बाद उन्हें भी बेलतरा या नए क्षेत्र की तलाश करनी पड़ेगी। हालांकि श्री दीवान का कहना है कि प्रत्याशी कार्यकर्ताओं और पार्टी के काम के बल पर जीतते हैं। राज्य में भाजपा के कार्यो और कार्यकर्ताओं की सक्रियता का लाभ उन्हें मिलेगा, चाहे वे कहीं से भी खड़े हो जाएं। नए परिसीमन का सबसे ज्यादा प्रभाव जरहागांव क्षेत्र के विधायक चुरावन मंगेशकर पर पड़ रहा है।
उनका विधानसभा क्षेत्र खत्म होने के बाद उन्हें भी नए क्षेत्र में दावेदारी करनी पड़ेगी। इस हालत में उनके लिए मुंगेली क्षेत्र आसान रहेगा, क्योंकि जरहागांव वहां से लगा हुआ है। हालांकि मुंगेली क्षेत्र के विधायक चंद्रभान बारमते भी आसानी से दावेदारी नहीं छोड़ेंगे। बिलासपुर लोस सामान्य होने के कारण श्री मंगेशकर के लिए यह विकल्प भी आसान नहीं होगा।
लोस के लिए बढ़ेंगे दावेदार: विधानसभा चुनाव के लिए नया परिसीमन तभी लागू हो सकता है, जबकि केंद्र सरकार जनवरी 2008 में अधिसूचना जारी कर दे। अगर ऐसा नहीं हो पाता, तो राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव नए परिसीमन के आधार पर होना मुश्किल है। इस हालत में लोकसभा चुनाव ही नए परिसीमन के तहत होंगे।
इस स्थिति में भी बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों में ही दावेदार बढ़ेगे। खींचतान की ज्यादा संभावना कांग्रेस में ही है। इसकी वजह है कि पिछले चार बार से भाजपा लगातार पुन्नूलाल मोहले को खड़ा कर जीत हासिल करते आई है। वहीं कांग्रेस में प्रत्याशी लगातार बदले हैं।
कांग्रेस में पहली बार खेलनराम जांगड़े, दूसरी बार तान्या अनुरागी, तीसरी बार रामेश्वर कोसरिया और चौथी बार बसंत पहारे ने श्री मोहल से मुंह की खाई है। आरक्षित होने से सीमित विकल्प होने के बाद कांग्रेस में यह स्थिति रही है। आज की स्थिति में पुराने प्रत्याशियों के साथ ही कांग्रेस में सामान्य वर्ग के नए दावेदार भी हर हाल में टिकट पाना चाहेंगे।
जिले में एक विधानसभा कम
नए परिसीमन के बाद दो विधानसभा क्षेत्र सीपत और जरहागांव को विलोपित करने के बाद एक नई सीट के गठन के बाद जिले में नौ विधानसभा क्षेत्र होंगे। प्रस्ताव के अनुसार मरवाही अनुसूचि जनजाति, कोटा अनुसूचित जनजाति, लोरमी सामान्य, मुंगेली अनुसूचित जाति, तखतपुर सामान्य, बिल्हा सामान्य, बिलासपुर, बेलतरा सामान्य और मस्तूरी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रहेंगे।