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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
विदा होते साल और आने वाले नए साल की खुशी अभी से जोर मारने लगी है। साल के पहले दिन की शुरुआत शिरडी वाले सांई दरबार में मत्था टेककर करने वाले शहरवासी 15 हजार से ज्यादा हैं। वहीं गोवा और वाइजेक में जश्न मनाने वाले भी अच्छी-खासी संख्या में हैं।
साल के आखिरी दिन के मद्देनजर लोगों ने इसकी तैयारी अपने-अपने हिसाब से पहले ही कर ली है। बिलासपुर के आसपास अमरकंटक, अचानकमार, रतनपुर, मल्हार, चैतुरगढ़, चंद्रहासिनी देवी जाने वालों के अलावा अब दूर जाकर 4 से 5 दिन तक इस बहाने नियमित दिनचर्या से हटकर भक्ति-भाव और जश्न मनाने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
ट्रेव्हलिंग एजेंसी व ट्रेनों में बर्थ की स्थिति बता रही है कि शहर के 50 हजार से ज्यादा लोग नए साल को मनोरंजक बनाने के लिए 500 से 1000 किलोमीटर की यात्रा कर इसका लुत्फ उठाने की तैयारी कर चुके हैं। जश्न की तैयारी लोगों ने एक-दो माह पहले ही कर ली थी। आंकड़े बताते हैं कि नए साल के पहले दिन शिरडी में सांई बाबा के दरबार में मत्था टेककर शुरू करने वालों की संख्या 15 हजार से भी ज्यादा है। शिरडी के साथ ही ये सभी नासिक त्रयंबकेश्वर भी जाएंगे। इसके बाद प्राकृतिक स्थल के रूप में पिछले कुछ सालों में विकसित हुए विशाखापट्टनम यानी वाइजेक जाने वाले भी 7000 के आसपास तो होंगे ही। इसके पीछे कारण बिलासपुर से 10 से 12 घंटे का सफर कर यहां पहुंचा जा सकता है और यहां के लिए लिंक एक्सप्रेस नियमित ट्रेन भी उपलब्ध है।
नए साल के जश्न के लिए गोवा आज भी घूमने-फिरने की इच्छा रखने वालों के बीच अपनी जगह बनाए हुए हैं। गोवा जाने वालों का आंकड़ा 8000 से 10000 के बीच है। गोवा के साथ-साथ इनकी मुंबई की भी सैर हो जानी है। वैष्णो देवी के दरबार में अपना शीश झुकाकर नया साल चालू करने वाले भी 4 से 5 हजार तो हैं। इसके अलावा नागपुर, कान्हा किसली व अन्य जगहों में जाने वाले 8 से 10000 के बीच हैं।
ठंड ने बिगाड़ा वैष्णो देवी का प्लान: ट्रेव्हलिंग एजेंटो के अनुसार वैष्णोदेवी जाने वालों की संख्या भी बहुत ज्यादा रहती है, लेकिन इस साल पड़ रही तेज ठंड ने बहुत से लोगों के इस प्लान को चौपट कर दिया है। शहर के ऐसे दो से तीन हजार लोग होंग,े जो चाहते हुए भी ठंड के चलते वहां नहीं गए हैं।
रकम खर्च करने के बाद भी नहीं व्यवस्था: जाने वालों की इस संख्या के बाद आनन-फानन में प्लान बनाकर नया साल शहर से दूर मनाने वालों की संख्या भी बहुत है। ऐसे लोगों के चलते ट्रेव्हलिंग एजेंटों को सबसे ज्यादा परेशान होना पड़ रहा है।
दुआ ट्रेव्हलर्स के संचालक संजय दुआ ने बताया कि हम चाहकर भी ऐसे लोगों के लिए व्यवस्था नहीं बना पा रहे हैं। अब इन तारीखें में न तो होटलों में जगह है और न ट्रेनों में बर्थ। ऐसे में हम चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते हैं।
दस करोड़ के सिंहासन ने बढ़ाया रुझान
शिरडी जाने वालों की संख्या में हुई बेतहाशा वृद्धि के पीछे पिछले दिनों सांई बाबा को दस करोड़ की कीमत के सोने के सिंहासन में बैठाया जाना भी बताया जा रहा है। इस सिंहासन में सांई बाबा के विराजमान हो जाने के बाद अब लोग एक बार फिर नए सिरे से उनका दर्शन करना चाह रहे हैं।
ट्रेनें फुल
शहर से बाहर जाने वालों का सिलसिला अभी से प्रारंभ हो गया है। 26, 27, 28 और 29 दिसंबर को लोग अकेले और परिवार के साथ रवाना हो रहे हैं। वहीं इनके लौटने का दौर 1 जनवरी शाम से चालू होकर 2, 3 और 4 जनवरी तक चलेगा।
इसके चलते लिंक, मुंबई-हावड़ा मेल, आजाद हिंद एक्सप्रेस, गोंडवाना, राजधानी एक्सप्रेस में इन 8 से 10 दिनों में नो रूम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में ट्रेनों में रिजर्वेशन कराने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।