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एक खोज में लगा दिया पूरा जीवन

ग्वालियर.doctor स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी कैलिफोर्निया में स्ट्रक्चरल बायोलॉजी के प्रोफेसर व 2006 में केमिस्ट्री के एकल नोबल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर रोजर डी कोर्नबर्ग ने क्रोमोजोम (गुणसूत्र) विन्यास के रहस्य जानने के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया। इस बात का खुलासा स्वयं कोर्नबर्ग ने हजारों छात्रों और शिक्षाविदों के मध्य किया। वे आज यहां आईटीएम यूनिवर्स के नॉद एम्फीथियेटर में आयोजित एक समारोह में व्याख्यान देने आए थे।

रोजर कोर्नबर्ग ने कहा कि पिछली एक शताब्दी से डीएनए और प्रोटीन से समान मात्रा में भरपूर क्रोमोजोम का विन्यास और उसकी प्रक्रिया एक रहस्य बनी हुई थी। मैंने इसी को आधार बनाकर अपने काम को आगे बढ़ाया और क्रोमोजोम की संरचना के अस्तित्व को खोजा। उन्होंने कहा कि क्रोमोजोम और डीएनए की आपसी गूंथ ही किसी भी जीवन की पहचान बनती है और यही वर्तमान में जैवचिकित्सा क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

प्रोफेसर कोर्नबर्ग को सुनने के लिए बुधवार को नाद एम्फी थियेटर में शहर की शैक्षणिक और शोध संस्थाओं, मसलन जीवाजी यूनिवर्सिटी, डीआरडीई, साइंस कॉलेज, केआरजी कॉलेज, के छात्र और शिक्षाविद् सुबह से ही जुटना आरंभ हो गए थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीबी शर्मा ने प्रोफेसर कोर्नबर्ग का स्वागत किया।

आईटीएम के चेयरमैन रमाशंकर सिंह ने स्वागत भाषण और दौलत सिंह चौहान ने संस्था की जानकारी दी। प्रोफेसर मधुमास चंद्र खरे ने आभार जताया और प्रो. योगेन्द्र मोहन गुप्ता ने अतिथियों को स्मृतिचिह्न् प्रदान किए। कार्यक्रम में एलएनआईपीई के कुलपति मेजर जनरल एसएन मुखर्जी सहित बड़ी संख्या में शहर का प्रबुद्धवर्ग मौजूद था।

प्रो. कार्नबर्ग के लेक्चर के बाद कार्यक्रम में शुरू हुआ सवाल-जवाब का सिलसिला। प्रो. कोर्नबर्ग ने छात्रों और शोधार्थियों के सवालों के जवाब बड़े ही आसान तरीके से दिए। इस अवसर उन्होंने महान वैज्ञनिक रेनॉल्ड की प्रतिमा का भी अनावरण किया।





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