जीवन दर्शन. बीते साल में भी सभी ने सफल होने के लिए कड़ी मेहनत की होगी। कुछ सफल रहे भी होंगे तो कुछ के हिस्से में अपेक्षित सफलता नहीं भी आई होगी। इनमें से तमाम इससे थोड़े निराश हुए होंगे। लेकिन उचित यह होगा कि वे निराशा में डूबने की बजाय अपनी मेहनत और पूर्ण समर्पण भरे प्रयास आने वाले नव वर्ष में भी जारी रखें। वे यह कतई न भूलें कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।
इससे जुड़ी एक दंतकथा याद आती है कि एक राजा ने एक बार अपने सलाहकारों को बुलाया और कहा कि सदियों के ज्ञान की बातें एकत्र करके लिखें ताकि वे उसे आने वाली पीढ़ियों को दे सकें।
काफी मेहनत के बाद उन सलाहकारों ने बुद्धिमता पर कई ग्रंथ लिखे और राजा के सामने पेश किए। राजा ने अपने सलाहकारों से कहा कि ये इतने लंबे हैं कि लोग पढ़ नहीं पाएंगे, इसलिए इन्हें छोटा करना पड़ेगा। सलाहकारों ने फिर मेहनत की और सिर्फ एक ग्रंथ बनाकर ले आए।
राजा ने फिर वही बात दोहराई। वे फिर वापस गए और उसे एक पाठ में लेकर आए। राजा इससे भी संतुष्ट नहीं हुआ और उसे और भी छोटा बनाने को कहा। राजा तब तक संतुष्ट नहीं हुआ जब तक वे सिर्फ एक वाक्य नहीं बनाकर लाए और वह वाक्य था-दुनिया में कोई भी चीज मुफ्त नहीं मिलती।
इसे समझें अपने प्रयास जारी रखें। अगर बीते साल में हमें अपेक्षित सफलता न मिल पाई हो, तो भी याद रखें कि मेहनत से बढ़िया विकल्प और कुछ हो ही नहीं सकता। सफलता तो देर-सबेर मिलेगी, क्योंकि शॉर्टकट नाम की चीज सफलता के लिए है ही नहीं।