सम्पादकीय. एक साल का बीतना अलग लोगों के लिए अलग मायने रखता है। युवा लोगों के लिए जहां इसका मतलब है खुशी मनाने का एक और मौका, वहीं उनके लिए जो अब जवान नहीं रहे, यह समय गंभीर रिमाइंडर की तरह है जो बिना किसी भेदभाव के यह बताता रहता है कि आपके बाकी जीवन काल में एक साल और कम हो गया। एक देश के लिए यह समय अपना स्टॉक चेक करने का है।
यह एक ऐसा समय है जब हम एक-दूसरे को किसी भी मिलने के मौके पर यह बताना नहीं भूलते कि पिछले दिनों क्या हुआ था, क्या होना चाहिए था और क्या नहीं होना चाहिए। अपने-अपने मुद्दों के हिसाब से हमारी अपनी लिस्ट होती है, जिसमें अमूमन विवशताओं और असफलताओं का जिक्र ही ज्यादा होता है। पर जरा सोचें कि क्या अपने आपको अपनी विफलताओं के बारे में बार-बार बताना जरूरी है?
उसके बदले क्या अच्छा नहीं होगा कि हम यह देखें कि क्या कुछ हमारे प्रयास से हमारे हक में हुआ? क्या अच्छा हुआ और कहां हम सफल रहे? और विचारें कि कैसे उन सफल कोशिशों को और मजबूत करें, आगे बढ़ाएं और उनसे सीखकर और बड़ी सफलता की ओर बढ़ें। इसका यह मतलब कतई नहीं है कि अपनी गलतियों से सीख न ली जाए, बल्कि आशय यह है कि क्यों न अपनी सफलताओं से सीख ली जाए?
इस साल हमने महिला सशक्तीकरण की बड़ी मिसाल पेश करते हुए देश के लिए पहली महिला राष्ट्रपति को चुना। हमने विपरीत आकलनों के बावजूद एक आश्चर्यजनक विकास दर बनाए रखी। हमारे देशवासियों ने खेलकूद, बिजनेस, मनोरंजन और शिक्षा के क्षेत्रों में नए विश्वस्तरीय कीर्तिमान स्थापित किए।
साधारण पृष्ठभूमि और सामान्य शुरुआत करने वाले लोगों ने असाधारण ऊंचाइयां हासिल कीं। और यह सब हासिल हुआ विपदाओं, भ्रष्टाचार और तमाम मोर्चो पर मिली नाकामियों के बीच। सही है, इस नव वर्ष में भी हमारे हिस्से आने वाली नाकामियों का सिलसिला जारी रहेगा। इसके बावजूद प्रबल संभावनाएं यही हैं कि हमारी उपलब्धियों की सूची नाकामियों पर भारी बैठेंगी।
वर्ष 2007 की तुलना में हमारी सफलता की गाथाओं की संख्या ज्यादा होगी। अधिसंख्य भारतीय, साधारण से लेकर सक्षम, सफलता के ऊंचे सोपान तय करेंगे। तमाम मील के पत्थर और रिकार्ड हमारी झोली में गिरेंगे। हमारा प्यारा तिरंगा वैश्विक खेल आयोजनों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शान से फहराया जाएगा।
हमें ध्यान रखना होगा कि सामूहिकता की भावना से ही हम आगे का सफर तय कर सकते हैं। अगर एक राष्ट्र के तौर पर हम अपनी नाकामियों पर शोक मनाते रह दुख प्रकट करते रहेंगे, तो हम 2008 की लड़ाई शुरू होने से पहले ही हार जाएंगे।
आज हम कुछ क्षण विचार करें कि बीते 365 दिनों में जीवन हमें कहां-कहां लेकर गया है। साथ ही ध्यान रखें कि इस वर्ष भी ऊंची और लंबी छलांग ही हमें आगे बनाए रखेगी। हां, रास्ते में आए गड्ढों को जरूर याद कर लें ताकि हमारी लंबी छलांग इस वर्ष इनसे रुकने न पाए।