भोपाल.
दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्र संगठन (आसियान) के 70 सदस्य दो दिन के लिए भोपाल आ रहे हैं। यहां सात और आठ जनवरी को उनकी एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने इस बैठक के मद्देनजर प्रवासी भारतीय दिवस समारोह के दौरान पूर्व निर्धारित दिल्ली प्रवास को रद्द कर दिया है।
वे इस बैठक में मप्र की विशेषताओं पर अपनी बात कहेंगे। दो महीने पहले इंदौर में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के बाद प्रदेश में अंतरराष्ट़ीय हलचल का यह दूसरा मौका है। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने आसियान की बैठक का अवसर मप्र को दिया है। यह बैठक होटल जहांनुमां में होने जा रही है।
दस देशों के प्रतिनिधियों के एक साथ भोपाल में होने के अवसर को सरकार प्रदेश की मार्केटिंग के मद्देनजर ‘घर पहुंच सेवा’ की तरह ले रही है। पहले दिन राज्य सरकार आसियान के सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के समक्ष अपना प्रजेंटेशन देगी। इसका फोकस प्रदेश में पूंजी निवेश को गति देना होगा।
मप्र राज्य औद्योगिक विकास निगम इसकी तैयारी में जुटा है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और मुख्य सचिव राकेश साहनी विशेष रूप से इस अवसर पर मौजूद रहेंगे। इसीलिए तय माना जा रहा है कि श्री चौहान सात से नौ जनवरी के बीच दिल्ली में प्रवासी भारतीयों के कार्यक्रम में नहीं जाएंगे।
भोपाल दर्शन भी- सूत्रों ने बताया कि आसियान का दल तीन दिवसीय दौरे पर भोपाल आएगा। दो दिन की बैठक के बाद नौ जनवरी को वे भोपाल दर्शन करेंगे। गौरतलब है कि आसियान के सदस्य देश चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और भारत के साथ मुक्त बाजार समझौते की दिशा में संवादरत हैं।
वर्ष 2013 तक यह दौर चलना है। मध्यप्रदेश के संदर्भ में यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के बाद इस बैठक से पूंजी निवेश का वातावरण और अनुकूल होगा और इसके दूरगामी परिणाम होंगे।
आसियान के बारे में-आठ अगस्त 1967 को स्थापना के समय इस संगठन में पांच सदस्य देश थे। ये हैं-इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड। बाद में कंबोडिया, वियतनाम, लाओ पीडीआर, म्यांमार और ब्रुनेई दारूस्सलाम भी इससे जुड़े। 1976 में आसियान की पहली समिट बाली में हुई और तब से अब तक 13 समिट हो चुकी हैं। आखिरी समिट गत नवंबर में सिंगापुर में संपन्न हुई। नए साल में 14 वीं समिट थाईलैंड में होना है।
विकास की अपार संभावनाएं
हमारी कोशिश है कि दूर देशों के लोगों को यहां के उजले पक्ष का पता चले। मध्यप्रदेश में एक अलग कार्यसंस्कृति विकसित करने की जरूरत है। औद्योगिक विकास से यह संभव है। अब तो सब जान रहे हैं कि यहां औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं।
-शिवराजसिंह चौहान मुख्यमंत्री