जयपुर. मकर संक्रांति में अभी एक पखवाड़ा शेष है, लेकिन गुलाबी नगर की छतों पर भोर के साथ ही ‘वो काटा-वो मारा’ का शोर सुनाई देने लगा है। स्कूलों में चल रहे शीतकालीन अवकाश के कारण बच्चे सुबह से ही पतंग उड़ाने में मस्त हो जाते हैं। एक जनवरी को स्कूल खुलने पर उन्हें पतंगबाजी के लिए कम ही समय मिल पाएगा, इसलिए वे छुट्टियों का पूरा आनंद उठा लेना चाहते हैं।
जयपुरवासियों के लिए पतंगबाजी किसी जुनून से कम नहीं है। बच्चे सुबह से ही छतों पर चढ़ जाते हैं, इसके बाद तो मानों खाना-पीना, नहाना धोना सब-कुछ वहीं होता है। इन दिनों कोई छतों पर कोई पतंग लूटता नजर आ रहा है तो कोई अपने प्रतिद्वंद्वी की पतंग को काटते देखा जा सकता है। सुबह से शुरू होने वाली पतंगबाजी शाम होते-होते अपने चरम पर होती है।
बाजार सजकर तैयार
हल्दियों का रास्ता, हांडीपुरा और चांदपोल बाजार में परंपरागत लगने वाली पतंगों की दुकानें तरह-तरह की पतंगों से सज रही हैं। इनके अधिकतर ग्राहक 10 से 18 साल तक के विद्यार्थी हैं, जो स्कूलों की छुट्टियों का जमकर आनंद ले रहे हैं।
छुट्टियां खत्म होने का मलाल
चांदपोल बाजार पुरानी बस्ती का रास्ता में रहने वाले अभिषेक ने बताया कि शीतकालीन अवकाश संक्रांति के दिनों में आने से पतंगबाजी का मजा दोगुना हो गया है। दिन इतनी जल्दी कट जाता है कि पता ही नहीं चलता, लेकिन एक जनवरी को स्कूल खुल जाएंगे और पतंगबाजी के लिए समय ही नहीं मिलेगा।