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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अब बच्चों को मास्टर जी के डंडे का डर नहीं सताएगा। यही नहीं उन्हें गलती पर मार भी नहीं पड़ेगी। स्कूल ग्राउंड के चक्कर लगाने और मुर्गा बनने जैसी सजा भी नहीं मिलेगी। एजुकेशन डायरेक्टोरेट ने सभी सरकारी स्कूलों में कॉरपोरल पनिशमेंट (शारीरिक सजा) पर सख्ती से प्रतिबंध लगाने के निर्देश जिला शिक्षा अधिकारियों को दिए हैं।
अब बच्चे करें शिकायत : पत्र में कहा गया है कि जिला शिक्षा अधिकारी अपने जिले के सभी स्कूलों में शिकायत बॉक्स का बंदोबस्त करें। ऐसे बच्चे जिन्हें टीचर ने मारा-पीटा हो या जिस टीचर से वे तंग हों, उसकी शिकायत बॉक्स में डाल सकेंगे। इन शिकायतों की मासिक बैठक में समीक्षा होगी। उसके बाद संबंधित टीचर के खिलाफ कार्रवाई होगी। बच्चे के माता-पिता को अगर कोई शिकायत है तो वे भी उच्चधिकारियों से मिल सकें
सुप्रीम कोर्ट की पहल :
राजस्थान में टीचर की पिटाई के दो दिन बाद छात्र की मौत और आंध्र प्रदेश में एक टीचर द्वारा छात्रों को बिजली के झटके देने के मामलों पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में टीचर द्वारा शारीरिक प्रताड़ना देने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई थी। यह प्रतिबंध 1 दिसंबर 2007 को लगा था।
दोषी हुए तो जाएगी नौकरीकोई टीचर शारीरिक सजा देने का आरोपी पाया गया तो उसकी नौकरी भी जा सकती है। रूल सात और आठ के तहत विभागीय कार्रवाई के दौरान इंक्रीमेंट रोकने के अलावा उसे डिमोट/टर्मिनेट भी किया जा सकेगा। इससे पहले टीचर का पक्ष भी सुना जाएगा। अभिभावक दोषी टीचर के खिलाफ पुलिस में भी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
कॉरपोरल पनिशमेंट की छूट नहीं दी जा सकती। यह पहले भी मान्य नहीं थी, न अब है। टीचर छात्र को शारीरिक सजा नहीं दे सकते। शिकायत मिलने पर विभागीय कार्रवाई होगी।—एम.एल. कौशिक, एडिशनल डायरेक्टर, एजुकेशन डायरेक्टोरेट, हरियाणा