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अकबर का कद या काम

परदे के पीछे.akbar आशुतोष गोवारीकर की फिल्म ‘जोधा अकबर’ पूर्व में घोषित प्रदर्शन तिथि 25 जनवरी के बदले संभवत: प्रेमियों के वैलेंटाइन दिवस के आस-पास 15 फरवरी को प्रदर्शित हो। इस विलंब के कई कारण हैं, परंतु कहा जाता है कि निर्माता तीन घंटे की फिल्म लगाना चाहते हैं और निर्देशक लंबाई कम कर रहा है।

ज्ञातव्य है कि आशुतोष की ‘लगान’ तीन घंटे 40 मिनट की फिल्म थी और ‘स्वदेश’ भी काफी बड़ी थी। फिल्म उद्योग और मीडिया में फिल्म की लंबाई को लेकर भ्रामक धारणाएं हैं। सब कुछ निर्भर करता है फिल्म के मनोरंजक होने में और दर्शक को बांधने की क्षमता में।

‘लगान’ साढ़े चार घंटे की भी सफल होती और ‘स्वदेश’ दो घंटे की भी असफल होती। यही बात ‘संगम’ और ‘मेरा नाम जोकर’ पर भी लागू होती है। दो घंटे से कम समय की होने के कारण ‘भेजा फ्राई’ नहीं चली है और ‘तारे जमीं पर’ के छोटा होने से व्यवसाय ज्यादा होता, यह भी भ्रामक है।

आमिर खान शिक्षा में गुणवत्ता और पालन-पोषण में शर्तहीन प्रेम की बात कह रहे हैं। बच्चों को हथियार की तरह न पालें और उन पर माता-पिता अपनी महत्वाकांक्षा नहीं लादें। विगत दशक में पालक अपने बच्चों को 100 प्रतिशत अंक लाने की अस्वाभाविक प्रतिस्पर्धा में झोंक रहे हैं और बच्चों की स्वाभाविकता के साथ निर्मम व्यवहार हो रहा है।

आज पालकों को आमिर की कड़वी सच्चाई नाकाबिले बर्दाश्त लग रही है, इसलिए ‘तारे जमीं पर’ को आसमानी सफलता नहीं मिल रही है। विगत दशक में शिक्षा (डिग्री-मात्र डिग्री) की छुरी से लोगों ने डॉलर कूटा है और माता-पिता के सीने में नए अरमान जगाए हैं। आज अच्छा इंसान होना किसी का मकसद नहीं है। सफलता ही एकमात्र सपना है, एकमात्र शिखर है। नैतिक मूल्य हाशिए में धकेल दिए गए हैं।

बहरहाल आशुतोष को ‘जोधा अकबर’ की प्रेम कहानी पर कैंची चलानी पड़ रही है। संपादन कथा को प्रवाह और प्रभाव देता है, परंतु प्रदर्शन की सुविधा उसका कोई आग्रह या शर्त नहीं हो सकती। सही काम को गलत वजह से नहीं किया जा सकता।

अकबर अपने कद नहीं वरन काम के कारण महान माने गए हैं। यह एक भ्रामक बात किसी जमाने में लोकप्रिय रही है कि अपराध जगत ने फिल्म कथानकों को प्रभावित किया, परंतु आज मल्टीप्लैक्स जरूर फिल्मकार पर दबाव बना रहे हैं।

एक सबसे छोटी फिल्म का प्रभाव देखिए कि उद्घाटन के लिए मंत्री जी आए हैं, परंतु चांदी की कैंची से फीता नहीं कट पाता। अत: मजबूत स्टील की तेज छुरी लाते हैं, परंतु फीता नहीं कटता। तेज से तेज, भीषण से भीषण शस्त्र लाए जाते हैं, परंतु फीता नहीं कटता। मंत्री जी थककर बेहोश हो जाते हैं। एक फिल्म महोत्सव में यह लघु फिल्म दिखाई गई थी। भगवान ‘जोधा अकबर’ की रक्षा करे।





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