भोपाल.
नया साल..अंग्रेजी कैलेंडर के जनवरी 2008 से शुरू होने वाला हो या फिर विक्रम संवत चैत्र प्रतिपदा से दोनों में समानता यह है कि शनि और मंगल की आपसी तनातनी का नतीजा विभिन्न देशों और जनता को विपत्तियों में डालने जैसा होगा।
हालांकि बृहस्पति अपने नाम के अनुरूप गुरु की तरह ही रक्षा कवच का काम करेगा। गुरु वर्तमान में धनु राशि में है, जिस पर उसका अधिपत्य है। उसके इस राशि में रहने पर धर्म का बोलबाला तो रहता है, पर धार्मिक उन्माद भी फैलता है। मंगल व शनि इसमें हिंसा के बीज डाल देते हैं। यह कहना शहर के अनेक ज्योतिषियों का।
गुरु बनने की शुरुआत होगी
ज्योतिषी भंवर लाल शर्मा का कहना है कि ईस्वी और विक्रम संवत के यह दोनों नए साल दुनिया को अनेक सौगातें दे कर ही विदा होंगे। खास कर भारत इस साल धर्म, आध्यात्म, ज्ञान और विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर इसी साल से अपने को दुनिया का गुरुमनवाने की शुरुआत कर देगा।
राजनेताओं की छवि को धक्का
पं. प्रहलाद पंड्या का मत है कि इस साल भी प्राकृतिक आपदाएं पीछा नहीं छोड़ेंगी। देश के कई राज्यों में बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल होगी और इनमें कई ख्याति प्राप्त राजनेताओं की छवि धूमिल होगी।
पं.जगदीश शर्मा का कहना है कि इस वर्ष कुंडली में सूर्य बुधादित्य योग मातृ भूमि भाव से है, जो प्रजा व राजा के बीच सामंजस्य स्थापित करेगा किंतु मंगल, राहू व शनि के प्रकोप प्राकृतिक आपदाएं बरपाते रहेंगे।
सत्ता परिवर्तन के आसार
पं. विनोद गौतम के अनुसार इस साल मंगल राहू का खड़ाष्टक योग विश्व के कई देशों की सत्ता में परिवर्तन करा सकता है। फसलें अच्छी होंगी, पर महंगाई में कोई खास गिरावट नहीं। विकास के बड़े काम पूरे होंगे। पड़ोसी देश से भारत में पलायन करने वालों की घुसपैठ हो सकती है। इससे सतर्कता जरूरी।