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ताकि कल दुनिया कह सके क्या थे वे लोग

इंदौर.sankalp सपने संकल्प बन जाएं तो ही साकार होते हैं, इस सोच के साथ दैनिक भास्कर ने नगर के टर्न अराउंड स्वप्न को सामूहिक संकल्प बनाने की पुख्ता तैयारी की है। इस तैयारी के कई आयाम और पहलू हैं। इन सबमें सिरमौर हैं इंदौर की ऐसी विश लिस्ट जिसमें समाई हो नगर के हर नागरिक की कामना और मनोकामना।

ऐसी बहुआयामी सूची बनाने के लिए दैनिक भास्कर ने अपने रजत जयंती वर्ष में नगर की 25 खूबियों, 25 कमियों, 25 भूलोंे और 25 उपलब्धियों पर आधारित आज और आज के 25 साल बाद के इंदौर की संकल्पना संजोई है।

इस कवायद को आगे बढ़ाते हुए एक्सपर्ट ग्रुप का गठन किया जा रहा है जिसमें शामिल किए जाएंगे वे लोग जिनके पास नगर के लिए चिंतन-मनन है और जिन्होंने अपनी उपलब्धियों से अपने कार्यक्षेत्र में जहां अपने लिए सफलता संजोई है वहीं नगर को भी नई दिशा दी है।

इंदौर को देश का एक बेहतरीन नगर बनाने की यह कवायद यहीं समाप्त नहीं होगी बल्कि यहीं से सही मायने में नगर के टर्न अराउंड प्लान का क्रियान्वयन शुरू होगा। मसलन जाने-माने आर्किटेक्ट्स से कहा गया है कि वे 25 साल बाद के इंदौर को डिजाइन करें। इसे एक सेमिनार में अंतरराष्ट्रीय स्तर के नगर नियोजकों से पुष्टि के बाद ही आपकी रायशुमारी के लिए अखबार में भी प्रकाशित किया जाएगा।

स्पष्ट है कि इंदौर का टर्न अराउंड प्लान व्यापक है जो महीनों चलने वाली कवायद है। यह सही परिप्रेक्ष्य में आप तक पहुंचे और सामूहिक संकल्प बने इसलिए अब हम हर रोज प्रकाशित करेंगे नगर पर केंद्रित एक विश्लेषणात्मक आलेख। इसके लिए विषय विशेषज्ञ चिह्नित किए गए हैं तो उन लोगों से भी संपर्क किया गया है जो लेखन नहीं करते लेकिन नगर के बारे में सोचते-समझते हैं।

ये सब हमें बताएंगे कि इंदौर में किस क्षेत्र का कल कैसा था, आज कैसा है और कल कैसा होगा? कहां चूक हुई, क्यों चूक हुई और कौन जवाबदार है? पर इन सबसे महत्वपूर्ण है कैसे हो भूल-सुधार। गौरतलब है कि समय पर ऐसे विश्लेषणों के अभाव में कई क्षेत्रों में बहुत कुछ पाकर हमने सब कुछ खोया है। इसी तारतम्य में हर सोमवार को हम पढ़ेंगे बदलती दुनिया में जनभागीदारी से कैसे बने और बदले हैं शहर। और बने हैं उस शहर के लोग मिसाल।

अगले हफ्ते से हर गुरुवार को इंदौर से जुड़े 25 तथ्यों के साथ हम याद करेंगे उन 25 लोगों को जिन्होंने कभी नगर पर राज किया और उनका अच्छा या बुरा प्रभाव आज भी कायम है। भास्कर अपने रजत जयंती वर्ष में शहर के आज रसूखदार 25 लोगों के साथ उन 25 लोगों को भी चिह्न्ति करेंगे जो कल के हीरो साबित हो सकते हैं। 25 सालों की उन 25 भूलों को भी भुलना नहीं चाहता जो इंदौर को 25 साल पीछे ले गई या 25 सालों की वे उपलब्धियां जो आगामी 25 सालों की बुनियाद बनने जा रही हैं।

रजत जयंती वर्ष में इतने सारे विचारोत्तेजक पठन-पाठन का लक्ष्य है यह तय करना कि इंदौर बड़ा नगर बने या बेस्ट नगर। गौरतलब है कि देश में कई बड़े नगर हैं जहां ढेर सारी सुख-सुविधाएं हैं लेकिन वहां लोग अच्छी जिंदगी को तरस गए हैं। मनुष्यों की भीड़ है लेकिन मानवता का अभाव है। आजीविका के लिए वहां रहना लोगों की विवशता है लेकिन वे खोज रहे हैं ऐसे शहर जहां वे सुकून से जी सकें। संयोग से मौसम व माहौल हर नजरिये से इंदौर इस खोज को पूरी करता है। हमारे पास मौका है कि हम ऐसा इंदौर गढ़ें कि नए लोग और नई पीढ़ी कह सके कि क्या थे वे लोग।





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