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मास्टर स्ट्रोक

इंदौर.plan 2008 ने कदम रखते ही ऐसा ‘मास्टर स्ट्रोक’ मारा कि यह आने वाले दिनों में शहर की तस्वीर बदलेगी। यह स्ट्रोक जनता को लुभाएगी, विकास के राह भी खोलेगी..और मुख्यमंत्री के लिए ‘चुनावी’ स्ट्रोक भी साबित होगी।

नए साल के पहले दिन कई कानूनी तथा प्रशासनिक अड़चनों को अंतिम क्षणों में दूर कर सरकार ने इंदौर का बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान लागू कर दिया गया। इस बारे में राजपत्र में अधिसूचना भी प्रकाशित कर दी गई है।

नगर व ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 19(5) के तहत लागू इस प्लान में जुलाई-2006 मे प्रकाशित प्रारूप में किए कई प्रावधान बदल दिए गए हैं और इन पर सुनवाई का मौका नहीं दिया गया है। सरकार के इस फैसले ने भू-माफिया के मंसूबे पर पानी फेर दिया है। प्लान का ज्यादा असर प्लानिग ऐरिया के बाहर दिखेगा।

काफी जद्दोजेहद के बाद लागू किए गए प्लान में ग्रीन बेल्ट, सार्वजनिक व अर्धसार्वजनिक के साथ ही औद्योगिक उपयोग की जमीनों को उसी स्थिति में रखा गया था, जो 1975-1991 के मास्टर प्लान में थी। प्रस्तावित प्रारूप मे इसमे व्यापक बदलाव किया गया था। लो डेनसिटी एरिया का एक नया प्रावधान इस प्लान में किया गया है और इसमें 15 प्रतिशत बिल्ट अप एरिया का प्रावधान किया गया है।

यह व्यवस्था प्रस्तावित प्रारूप में नहीं थी। प्रारूप में शहर के अलग-अलग हिस्सों के लिए जो फ्लोर एरिया रेशो तय किया गया था, उसे भी बदल दिया गया। शहर के भीड़ भरे इलाके छोड़ बाहर जाने वालो के साथ ही रीयल इस्टेट के नए निवेशकों को इंसेंटिव के रूप मे कुछ प्रतिशत ज्यादा एफएआर दिया जाएगा।

प्रारूप में एक बड़ा बदलाव करते हुए यह भी सुनिश्चित कर दिया गया है कि किस लैंडयूज की जमीन में क्या क्या हो सकेगा। इससे अभिप्राय यह है कि विभिन्न प्रयोजन के लिए आरक्षित जमीन का उपयोग किस-किस काम में हो सकेगा।

प्लान शहर हित में
मंगलवार को इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री ने देवी अहिल्या एअरपोर्ट पर संवाददाताओं से चर्चा के दौरान कहा-
मास्टर प्लान में क्या है?
- बस इतना पता है कि मास्टर प्लान शहर हित में है। आवास एवं पर्यावरण मंत्री जयंत मलैया ने ही मास्टर प्लान को अपनी देख रेख में तैयार करवाया है। वे ही सारी जानकारी दे पाएंगे।

- कहीं भूमाफिया कोर्ट की शरण में जाकर इस पर रोक तो नहीं लगवाएंगे?
मुझे नहीं लगता कि ऐसा वे कर पाएंगे।

लो डेनसिटी एरिया का प्रॉविजन से हरियाली खत्म होने का खतरा है?
नहीं, मुझे नहीं लगता।

- म.प्र. महाअधिवक्ता रघुनंदन सिंह का इस्तीफा?
- अभी मुझे कोई जानकारी नहीं है।

परेशानी का यह सही हल नहीं
>> मास्टर प्लान में शहर के फैलाव से जो परेशानी आएगी, उसका कहीं हल नहीं है। इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ेगा। उपजाऊ कृषि भूमि को बचाने की सोच भी इसमें नहीं दिखती है। यह पब्लिक ट्रांसपोर्ट सपरेटेड मास्टर प्लान नहीं है।

साइकिल, पैदल और यहां तक कि टू व्हीलर चालकों के लिए इसमें कोई प्रावधान नहीं है। इससे गाड़ियों की संख्या और प्रदूषण दोनों ही बढ़ेगा। सीनियर सिटिजन की जनसंख्या बढ़ रही है जबकि मास्टर प्लान में शहर की मोबलिटी होना चाहिए थी। इसका बुरा असर तो अभी से दिख रहा है।
-आर.एस. गट्टानी, पूर्व निदेशक, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग

ये हैं स्ट्रोक्स
सामाजिक, शैक्षणिक,स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा गतिविधियों के लिए अलग से शहर में चार प्रक्षेत्र विकसित किए जाएंगे। प्लान के प्रारूप में इन गतिविधियों को पहले आवासीय के तहत मान्य किया गया था। इसके पीछे तर्क यह था कि ये प्रस्ताव बाजार के हिसाब से मान्य होंगे,लेकिन आपत्तियों के बाद यह तय किया गया कि अगर इन गतिविधियों को अलग से अंकित करना होगा।

सुपर कॉरिडोर-आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए यह जोन पहली दफा बनाया जाना है। इसके तहत विमानतल से आधे शहर को जोड़ने वाली लगभग 9 किलोमीटर लंबी सड़क को आर्थिक विकास क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

मिश्रित भू-उपयोग-मुख्यमार्र्गो से लगी कालोनियों में मिश्रित भू उपयोग की अनुमति दी जाएगी। नर्सिग होम,आफिस एवं अन्य गैर आवासीय उपयोग के लिए संबंधित को उस कालोनी के रहवासियों की सहमति लेना होगी।

यातायात सुधार- शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रस्तावित मास्टर प्लान में रेल पुल, शहर के अलग-अलग हिस्सों में अंतर्राज्यीय बस स्टेंड, कई चौराहों का विकास, व्यस्ततम मार्र्गो पर सब-वे का निर्माण, ज्यादा यातायात वाले क्षेत्रों के पुलों का चौड़ीकरण और कुछ नए पुल बनाए जाने हैं।

अतिरिक्त एफएआर- शहर के सघन एवं निर्मित इलाके में आबादी के दबाव को कम करने के लिए अगर प्रस्तावित भू-उपयोग का विकास पांच साल में पूरा हो गया तो अतिरिक्त एफएआर पूर्णता पर मिलेगा।

ग्रीन बेल्ट में बनी अवैध कालोनियों का विस्थापन कर आवासीय क्षेत्र के ग्रीन हिस्से को यथावत ग्रीन ही रखा जाएगा।





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