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पहला दिन, सब गोलमाल

रायपुर. gutka शहर में मंगलवार को गुटखा भी बिका और पतले कैरीबैग का भी इस्तेमाल हुआ। हेलमेट के बगैर दोपहिया चालक हवा से बातें करते भी दिखें। प्रशासन ने कहना है कि इन पर सख्ती की जाएगी। शहर में गुटखे के तलबगारों को पूरी तरह मायूस नहीं होना पड़ा। पानठेलों में खुले तौर पर पाउच नहीं बिके, लेकिन विक्रेताओं ने ग्राहकों को निराश नहीं किया।

भास्कर टीम ने आज कई इलाकों में सरकारी फरमान का असर देखा। ज्यादातर इलाकों में गुटखा पाउच चोरी-छिपे बिकते रहे। शासन ने जर्दायुक्त गुटखे पर 1 जनवरी से रोक का फरमान सोमवार को जारी किया। आज खाद्य नियंत्रक एवं औषधि प्रशासन ने इसके आदेश सभी कलेक्टर और एसपी को जारी किए। इसकी प्रतिलिपि तकरीबन दर्जनभर विभागों को दी गई है।

आदेश में कहा गया है कि 1 जनवरी से राज्यभर में जर्दा वाले गुटखा की बिक्री को प्रतिबंधित किया गया है। इसकी बिक्री करने वालों पर कार्रवाई की जाए। राजधानी में जिला प्रशासन की टीम ने कुछ इलाकों में कार्रवाई की। राजस्व, खाद्य और पुलिस के दल ने शास्त्रीबाजार और गोलबाजार में दबिश दी। वहां से 475 पाउच जब्त किए गए, लेकिन प्रशासन का यह अभियान सीमित क्षेत्र तक ही रहा। ज्यादातर जगहों पर इसकी बिक्री होती रही।

पान-ठेलों में इन्हें लटकाया नहीं गया था, लेकिन मांगने पर दुकानदार बेचते रहे। कहीं-कहीं गुटखा प्रिंट से ज्यादा दाम में भी बिके। अवंतिविहार में दो रुपए का गुटखा पांच रुपए में बिका। फाफाडीह से खमतराई तक पान-ठेलों में सामने गुटखे नहीं दिखे, लेकिन मांगने पर मिल भी रहे थे।

कलेक्टर विकासशील ने बताया कि कार्रवाई के लिए टीम बना दी गई है। यह छापे मारकर कार्रवाई करेगी। खाद्य नियंत्रक एवं औषधि के राज्य कार्यालय, जिला कार्यालय और प्रयोगशाला में इसकी कोई कार्रवाई नहीं दिखी। मुख्य कार्यालय मे इसके आदेश फैक्स जरूर किए गए। स्वास्थ्य विभाग के सचिव पी रमेश कुमार का कहना कि आदेश एक दिन में लागू नहीं किया जा सकता। धीरे-धीरे प्रतिबंध लगेगा। इसमें और कड़ाई बरतने के लिए योजना बनाई जा रही है।

आसान नहीं प्रतिबंध
सरकार ने गुटखा पर प्रतिबंध जरुर लगा दिया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इस पर अमल कराना काफी कठिन होगा। क्योंकि इस पर कार्रवाई करने के लिए खाद्य नियंत्रक एवं औषधि प्रशासन के पास अमला नहीं हैं। पूरी कार्रवाई कलेक्टर और एसपी के ऊपर निर्भर है। खाद्य एवं औषधि विभाग में फूड इंस्पेक्टर के 30 पद हैं, लेकिन पदस्थ केवल तीन ही हैं।

स्टाफ की इतनी कमी है कि विभाग की प्रयोगशाला में केवल चार-पांच अधिकारी हैं। अव्यवस्था का आलम यह था कि प्रयोगशाला में दोपहर 12 बजे के बाद कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि फूड इंस्पेक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। यह जल्द ही पूरी हो जाएगी।

हाईकोर्ट की शरण
इधर चर्चा है कि आदेश के खिलाफ गुटखा लाबी ने हाईकोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक राज्य शासन ने इसके लिए केविएट नहीं लगाया है। उल्लेखनीय है कि इसके पहले जिन राज्यों में सरकार ने गुटखा पर प्रतिबंध लगाया वहां हाईकोर्ट से स्टे मिल गया। हालांकि महाराष्ट्र और गुजरात में स्टे भी नहीं मिला है।

10 करोड़ का नुकसान
वाणिज्यिक कर आयुक्त अजय सिंह ने बताया कि गुटखे पर प्रतिबंध से सरकार को सालाना करीब 10 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। लोगों के स्वास्थ्य के लिए सरकार नुकसान बर्दाश्त करेगी।





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