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सिनेमा के सफर में अगली लहर है भोजपुरी फिल्में

अगर हॉलीवुड को बॉलीवुड कड़ी चुनौती पेश कर रहा है और उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है तो क्षेत्रीय भारतीय सिनेमा भी पीछे नहीं है। इन क्षेत्रीय भाषाई सिनेमा में भी भोजपुरी बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और लोकप्रियता के आलोक में भोजपुरी सिनेमा बहुत जल्द वैश्विक रूप-स्वरूप अख्तियार कर लेगा। आधुनिक तकनीक और कारपोरेट घरानों के आगमन के आधार पर कह सकते हैं कि यह वर्ष भोजपुरी सिनेमा का होगा। bhojpuri

भोजपुरी सिनेमा को आज जो स्थान हासिल हुआ है वह ईमानदारी के साथ की गई मेहनत का परिणाम है। इसके लिए मीडिया भी बधाई का पात्र है, जिसने भोजपुरी सिनेमा और उससे जुड़े कलाकारों को यथोचित पहचान दी। अपनी बोली और भाषा के प्रति सम्मान का भाव भी भोजपुरी सिनेमा के इस सफर में महत्वपूर्ण कारक साबित हुआ है।

इस उपलब्धिपूर्ण सफर के बावजूद कुछ लोग मानते हैं कि भोजपुरी सिनेमा को राष्ट्रीय स्वीकृति नहीं मिल सकी है। यह मानने वालों को मैं सिर्फ बताना चाहता हूं कि हिंदी फिल्मों के बाद कमाई के मामले में भोजपुरी सिनेमा ही ठहरता है। अकेले मुंबई में 40 से 60 लाख रुपए का व्यवसाय एक-एक भोजपुरी फिल्में करती हैं। इसके अलावा दिल्ली, पंजाब भी भोजपुरी फिल्मों के बड़े बाजार बनकर उभरे हैं। भोजपुरी के जानकार आपको हर राज्य में मिल जाएंगे।

इसके बावजूद उसे राष्ट्रीय न मानना समझ से परे है। भोजपुरी का बाजार सिर्फ देश के भीतर ही नहीं बल्कि विदेशों में भी तेजी से फैल रहा है। जहां-जहां भोजपुरी भाषा बोलने और समझने वाले बैठे हैं, वहां-वहां हमारी फिल्में कमाल दिखा रही हैं। अन्य भारतीय भाषाओं की फिल्मों के साथ ऐसा नहीं है, वे अपने सीमित दायरे में ही व्यवसाय कर पा रही हैं।

यह भी गौर करने वाली बात है कि अन्य क्षेत्रीय भाषाई सिनेमा की तुलना में भोजपुरी सिनेमा अभी शैशवकाल ही में है। इसके बावजूद वह लंदन, मॉरीशस सरीखी महंगी विदेशी लोकेशनों पर अपनी फिल्में शूट कर रहा है। अत्याधुनिक तकनीक के समावेश से फिल्में बन रही हैं। कारपोरेट घराने आ रहे हैं। गब्बर सिंह पर बनने वाली फिल्म को देख दर्शक दांतों तले अंगुलियां दबा लेंगे।

इसी तरह एक वर्ग यह भी मानता है कि भोजपुरी सिनेमा वल्गर है। उसके संवाद और पात्र अप टू द मार्क नहीं हैं। उन्हें भी मैं बताना चाहूंगा कि इस भ्रांति को तोड़ने के लिए ही मैं ‘बिग बॉस’ के प्लेटफॉर्म तक गया। उसके जरिए 156 देशों के लोगों ने जाना है कि भोजपुरी फिल्में और उसके कलाकार क्या हैं। उस प्लेटफार्म का इस्तेमाल सिर्फ इसीलिए किया गया ताकि लोगों की भोजपुरी सिनेमा की बाबत गलतफहमियां दूर हो सकें।

भोजपुरी देखने वाले सिर्फ हिंदी बेल्ट के लोग ही नहीं हैं, बल्कि समाज का एलीट वर्ग भी इन फिल्मों को बड़े चाव से देखता है। तमिल, तेलुगु या अन्य किसी क्षेत्रीय भाषा के सिनेमा की वह पहुंच नहीं है, जहां भोजपुरी फिल्में जा रही हैं। भोजपुरी सिनेमा अपनी विषय वस्तु, तकनीक और बजट के मामले में भी किसी से कमतर नहीं है। मैं फिर कहना चाहूंगा कि आप यह याद रखें कि अभी भोजपुरी सिनेमा अपने शैशव काल में ही हैं।

पिछले कुछ वर्षो में भोजपुरी सिनेमा ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उसके आधार पर मैं कह सकता हूं कि यह वर्ष हमारे लिए बहुत सुनहरा साबित होने वाला है। मैं इसे स्वर्णिम काल के तौर पर देख रहा हूं। अभी भी हम औसतन 90 से 100 भोजपुरी फिल्में प्रति वर्ष बना रहे हैं।

मुझे पूरी उम्मीद है कि इस वर्ष यह आंकड़ा 130 से 140 फिल्मों तक पहुंच सकता है। बजट की बात करें तो जो फिल्में कल 30 से 30 लाख रुपए में बन रही थीं। वहीं आज उनका बजट दो-तीन करोड़ रुपए होना आम हो गया है। भोजपुरी सिनेमा आने वाले समय में नई ऊंचाईयां छुएंगा, इसमें रत्ती भर भी शक की गुंजायश नहीं है।

हम इस सचाई को क्यों नजरअंदाज कर रहे हैं कि इस वक्त हिंदी फिल्मों के शहंशाह से लेकर ड्रीम गर्ल तक भोजपुरी सिनेमा में काम कर रही हैं। मेरा आशय अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी से तो है ही। साथ ही मैं अजय देवगन, मिथुन चक्रवर्ती जैसे हिंदी के दिग्गज कलाकारों की तरफ भी लोगों का ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूं, जो भोजपुरी फिल्मों में काम कर रहे हैं। सायरा बानू भी भोजपुरी फिल्मों की निर्मात्री बन गई हैं। इन जैसे बड़े स्टारों के आने से आप सहज कल्पना कर सकते हैं कि भोजपुरी सिनेमा का कल क्या होगा। और तो और विदेशी नायिकाएं भी अब हमारी फिल्मों का हिस्सा बनने लगी हैं।

भोजपुरी सिनेमा के स्वर्णिम भविष्य को लेकर मैं इसलिए भी इतनी बड़ी बात कह सकता हूं कि मैं इसमें शुरुआत से हूं। मुझ समेत तमाम अन्य सितारों ने इसे अपने खून-पसीने से सींचा है। हमारी मेहनत का असर है कि भोजपुरी फिल्मों और उसके कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिलने शुरू हो गए हैं। क्या किसी सिनेमा की लोकप्रियता को आंकने के लिए इतना काफी नहीं है?

अगर अभी भी किसी को शक है तो वह देशी स्पाइडरमैन पर बनने वाली भोजपुरी फिल्म देखे। तकनीकी प्रधान और भव्य बजट की यह शुरुआत भर है। आगे-आगे देखिए भोजपुरी सिनेमा कितने मील के पत्थर स्थापित करता है। तीस करोड़ के आसपास भोजपुरी बोलने वाले और 56 देशों में उनकी उपस्थिति नया रंग खिला कर रहेगी।

लेखक भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार हैं।





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