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जोनल प्लान में 'खेल' न हो जाए

इंदौर. लंबी मशक्कत के बाद आया मास्टर प्लान-2021 भू-माफियाओं से बचा हुआ नजर आ रहा है। इसके बाद भी मुसीबत टली नहीं है। भू-माफियाओं की नजर नगर निगम की जोनल प्लानिंग पर टिकी है और उसमें 'खेल' होने का खतरा जानकार महसूस कर रहे हैं।

नगर तथा ग्राम निवेश की धारा 20 में मास्टर प्लान लागू होने के बाद जोनल प्लानिंग का अधिकार नगर निगम को है। जनसंख्या और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर पूरे प्लान को 11 यूनिट में बांटा गया है। इसमें क्षेत्रवार अनेक सुविधाएं शामिल हैं। नियम मुताबिक जोनल प्लान छह महीने में बन जाना चाहिए। जानकार बताते हैं जोनल प्लान फाइनल होने के बाद उसमें संशोधन नहीं किया जा सकता। ऐसे में प्लान बनने के दौरान ही भू-माफिया बदलाव का दबाव बनाएंगे।

इन पर होगी भू-माफियाओं की नजर

पीपल्याराव, चोइथराम के सामने, अयोध्यापुरी, प्रेस कॉम्पलेक्स से लगी भूमि, कैट के आसपास, अहीरखेड़ी, अन्नपूर्णा मंदिर के पास, विदुरनगर, वैलोसिटी के पास के क्षेत्र इसमें शामिल हैं। इसी तरह सड़कों में कनाड़िया से बंगाली कॉलोनी, एमजी रोड, ढक्कनवाला कुआं, एमआर-9, लाबरिया भेरू, नवरतनबाग सहित वे सभी सड़कें शामिल हैं जिनसे भू-माफिया का हित जुड़ा है।

पहले हो चुका है फेरबदल

प्लान-1976-91 में मात्र दो जोनल प्लान पीपल्याहाना (पीयू-6) व पीपल्याराव (पीयू-8) को मंजूरी दी गई थी। इसमें पीपल्यापाला तालाब के पास का ग्रीन बेल्ट औद्योगिक कर दिया था। हालांकि तब अधिकार राज्य शासन के पास थे जो 74वें संविधान संशोधन के बाद नगर निगम को मिल गया। चार माह में काम शुरू हो जाएगा

प्लान देख लिया है। सड़कों को लेकर सबसे पहले योजना तैयार की जाएगी। 4 माह में इस पर पूरी तरह काम शुरू कर दिया जाएगा।
डॉ. उमाशशि शर्मा, महापौ





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