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सात साल में निपटा छग-मप्र का विवाद

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल के गठन के बाद से ही बिजली कर्मियों के बंटवारे पर तलवारें खिंची हुई थीं। मध्यप्रदेश विद्युत मंडल छत्तीसगढ़ को अधिक से अधिक कर्मचारी भेजने पर आमादा था। लेकिन छत्तीसगढ़ ने अतिरिक्त कर्मचारी लेने से इनकार कर दिया। विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। केंद्र सरकार को इस पर हस्तक्षेप करते हुए मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव वीके कपूर की अध्यक्षता में बंटवारे के लिए समिति बनानी पड़ी थी।

कई दौर की बैठकों के बाद दोनों राज्यों ने एक-दूसरे की कुछ शर्ता को मानने के लिए सहमति दी। भोपाल में पिछले दिनों हुई बैठक में विद्युत मंडल अध्यक्ष राजीब रंजन ने साफ कर दिया था कि छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों को ही यहां स्वीकार किया जाएगा।मध्यप्रदेश से बंटवारे में मिले कुल 1057 कर्मचारियों में से 660 ज्वाइन कर चुके हैं। बाकी कर्मचारियों के फरवरी तक यहां आने की संभावना है। छत्तीसगढ़ से करीब 50 कर्मचारी मध्यप्रदेश जाना चाहते हैं।

दोनों राज्यों की सहमति के आधार पर कर्मचारियों के आदान-प्रदान की अंतिम सूची शुक्रवार को प्रकाशित की गई। आपत्ति दर्ज कराने कर्मचारियों को 31 जनवरी तक का समय दिया गया है। बिजली बोर्ड की वेबसाइड में भी यह सूची देखी जा सकती है।

बोर्ड के सचिव वीके जैन ने बताया कि आपत्तिकर्ता को सुनवाई के लिए खुद के खर्च पर उपस्थित होना होगा। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ से करीब 50 कर्मचारियों ने मप्र जाने की इच्छा जताई थी। उन्हे बोर्ड ने फिर से विचार करने का मौका दिया है। वे चाहें तो छत्तीसगढ़ में ही रह सकते हैं।

18-19 को फिर बैठक
बंटवारा विवाद निपटाने मप्र व छत्तीसगढ़ बिजली बोर्ड गंभीर दिख रहे हैं। दोनों बोर्ड के प्रमुखों की इसी माह फिर बैठक बुलाई गई है। श्री जैन ने बताया कि यह बैठक 18-19 जनवरी को होगी। छत्तीसगढ़ के खाते में आए 1057 कर्मचारी। यहां से मध्यप्रदेश 50 कर्मचारी जाएंगे। फरवरी तक हो जाएगा कर्मचारियों का आदान-प्रदान। मध्यप्रदेश से 660 कर्मचारी पहले ही यहां आ चुके हैं और शेष 397 कर्मचारी अगले दो महीने में आ जाएंगे।





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