जयपुर. विज्ञान के जटिल प्रयोग और गणित के सूत्र को रटना भूल जाइए। अब विजुअल बोर्ड तकनीक से बना सॉफ्टवेयर एनीमेशन की सहायता से बच्चों को विज्ञान और गणित पढ़ाएगा। शुरुआती तौर पर इस सॉफ्टवेयर में सीबीएसई की कक्षा ७ से लेकर १0 तक का सिलेबस अपलोड किया गया है। अगले शैक्षणिक सत्र तक इसमें राजस्थान बोर्ड का सिलेबस भी अपलोड कर दिया जाएगा।
सॉफ्टवेयर को राज्य सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और साइंस ट्यूटर आशीष अरोड़ा ने मिलकर तैयार किया है। सॉफ्टवेयर निर्माताओं का दावा है कि देश में पहली बार ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया गया है। आई-नो नाम के इस सॉफ्टवेयर के एक किट की कीमत २000 रुपए है।
200 घंटे की क्लासेज
अरोड़ा ने बताया कि बाजार में अभी कई तरह की सीडी और डीवीडी मौजूद है जिससे पढ़ाई हो सकती है। मगर कोई भी सीडी या डीवीडी ऐसी नहीं है जिसमें किसी भी कक्षा के स्टूडेंट के लिए पूरा सिलेबस मौजूद हो। इस सॉफ्टवेयर में एक शैक्षणिक सत्र के सिलेबस की २क्क् घंटे की क्लासेज लोड है।
इसलिए यह सॉफ्टवेयर पूरी तरह से ‘टार्गेट ओरिएंटेड’ है। उन्होंने बताया कि यूरोप के कुछ देशों में इससे मिलते-जुलते सॉफ्टवेयर की मदद से पढ़ाई कराई जाती है। मगर उनमें विजुअल बोर्ड तकनीक नहीं है। इस सॉफ्टवेयर में विजुअल बोर्ड तकनीक, वॉयर ओवर टेक्सट और एनीमेशन के जरिए पढ़ाई कराई जाएगी।
सीधे कंप्यूटर में लोड होगा
सॉफ्टवेयर के परियोजना अधिकारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अनिल कुमार भार्गव ने बताया कि फिलहाल इसमें विज्ञान और गणित के सिलेबस लोड किए गए हैं, लेकिन एक वर्ष के अंदर ही इसमें भूगोल और अंग्रेजी के सिलेबस भी शामिल कर दिए जाएंगे।
इस इंस्टॉल करने के लिए सीडी डीवीडी की जरूरत नहीं होगी। यह सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन किट में है, जिसे यूएसबी पोर्ड की मदद से कंपयूटर में लोड कर दिया जाता है। इसके अलावा अगर किसी स्टूडेंट को लोडेड सूचना से ज्यादा कुछ जानना है तो वह ऑनलाइन जाकर जान सकता है। मगर यह सुविधा जुलाई से शुरू होगी।
क्यों पड़ी जरूरत
अरोड़ा बताते हैं कि विज्ञान में जो पढ़ाया जाता है, उसे प्रयोग के माध्यम से ही समझाया जाएगा। भूगोल के सॉफ्टवेयर में बच्चों को एनीमेशन से बताया जाएगा कि कौन सा द्वीप कहां है, हवाएं कैसे चलती है और मानसून कैसे आता है।