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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. केंद्रीय सरकार की सहायता से पोषित स्वर्ण जयंती ग्रामीण स्वरोजगार योजना (एसजीएसवाय) के क्रियान्वयन में जिला पंचायत ने प्रथम स्थान अर्जित करने में सफलता प्राप्त की है। उल्लेखनीय है कि जिला पंचायत ने प्रदेश भर के जिला पंचायतों की तुलना में वित्तीय वर्ष की समाप्ति के 3 महीने पहले ही स्वसहायता समूहों को क्रेडिट मोबीलाइजेशन (आर्थिक सहायता) प्रदान कर दिया।
गौरतलब है कि जिला पंचायत को इससे पहले वर्ल्ड बैंक द्वारा पोषित गरीबी उन्मूलन के लिए संचालित ‘नवा अंजोर’ राष्टर्र्ीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के क्रियान्वयन तथा भुगतान, शिक्षाकर्मियों की भर्ती रिकार्ड समय में करने के मामले में भी अग्रणी होने का गौरव हासिल हो चुका है।
जिला पंचायत को 31 मार्च 2008 तक स्वसहायता समूहों को स्वरोजगार के लिए 10 करोड़ 35 लाख रुपए की ऋण राशि वितरित करनी थी, परंतु जिपं ने लक्ष्य से अधिक 10 करोड़ 46 लाख रुपए की सहायता जिले के स्वसहायता समूहों को उपलब्ध कराई, जो लक्ष्य का 101 फीसदी होता है। इसी प्रकार योजना के लक्ष्य के मुताबिक 296 स्वसहायता समूहों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना था।
जिपं ने इसके विरुद्ध 302 स्वसहायता समूहों को ऋण उपलब्ध कराया, जो लक्ष्य का 102 फीसदी होता है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास ने जिला पंचायत द्वारा समय से पहले ही लक्ष्य पूर्ति करने पर सराहना की गई। पिछड़ा क्षेत्र विकास निधि(बीआरजीएफ) की गुरुवार को राजधानी में आयोजित समीक्षा बैठक में भी इस उपलब्धि की चर्चा की गई। प्रदेश का कोई जिला योजना का लक्ष्य पूरा नहीं कर सका है।
जिला पंचायत ने न केवल योजना का वार्षिक लक्ष्य पूरा किया बल्कि अजा, जजा को 50 फीसदी तथा महिलाओं को 40 फीसदी लाभ दिलाने में लक्ष्य से अधिक सफलता प्राप्त की। जिला पंचायत ने अजाजजा के 2540 हितग्राहियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई, जो लक्ष्य का 67 फीसदी होता है। इसी प्रकार 73 फीसदी महिलाओं को योजना का लाभ दिलाया गया।
इसलिए हुआ फिर अव्वल
जिला पंचायत के सीईओ सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बताया कि एसजीेएसवाय योजना का लक्ष्य पूर्ण करने में समय पूर्व सफलता इसलिए मिली, क्योंकि उन्होंने योजना को दीगर योजनाओं से जोड़कर कार्य किया। मसलन एसजीएसवाय के अंतर्गत स्वसहायता समूहों को 15 रोड रोलर, 100 मिक्सर मशीन, सेंट्रिंग प्लेट के लिए ऋण दिया।
जिनका उपयोग रोजगार गारंटी योजना, सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत निर्मित होने वाले भवनों, डब्ल्यूबीएम सड़क के निर्माण आदि में हुआ। भविष्य में जैविक, वर्मी कम्पोस्ड खाद के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उत्पादित खाद का उपयोग वन विभाग की नर्सरी आदि में किया जा सके। उन्होंने बताया कि सिंचाई में बढ़ोतरी के जरिए कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए नलकूप उत्खनन के लिए भी ऋण दिया जा रहा है। एसजीएसवाय के अंतर्गत जिपं ने लघु, कुटीर उद्योगों से लेकर भवन निर्माण संबंधी यहां तक की गिट्टी, मुरुम खदान के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है।