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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. ‘दैनिक भास्कर’ में शुक्रवार को दिहाड़ी कर्मचारियों के भरोसे चल रहे आरटीओ कार्यालय की खबर छपने के बाद नजारा बदल गया था। शुक्रवार को आनन-फानन में इन बाहरी युवकों को काम से बाहर कर दिया गया। इसके चलते आज रोज तेजी से निपटने वाली फाइलें टेबलों में अटकी रहीं।आरटीओ कार्यालय का पूरा कामकाज पिछले तकरीबन 4 साल से बाहरी युवकों ने संभाल रखा है।
वहां के बाबुओं ने अपने काम के हिसाब से 3 से 4 युवकों को काम पर रखा हुआ है। इन बेरोजगारों को 100,150 और 200 रुपए उनके काम के हिसाब से दिया जाता है। सरकारी कर्मचारियों को पूरा का पूरा सरकारी कामकाज इनके जिम्मे ही चला करता है। आरटीओ कार्यालय में चल रही इस भर्राशाही की खबर भास्कर ने अपने 4 जनवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित की। इसके बाद से इस कार्यालय में हड़कंप की स्थिति है।
शुक्रवार को किसी भी बाहरी कर्मचारी से सरकारी कर्मचारियों ने काम ही नहीं लिया। इन सभी को काम पर न आने मौखिक आदेश अधिकारियों ने सुबह ही जारी कर दिए थे। इसका असर कामकाज पर भी नजर आया। रोज एक बाबू के टेबल से निपटने वाली 30 से 35 फाइलों की संख्या गिरकर 8 से 10 पहुंच गई थी।इसके चलते आरटीओ दफ्तर अपना नियमित कामकाज लेकर पहुंचने वाले लोग परेशान होते रहे। रटीओ दलाला भी पेरशान होते रहे। वहीं रोज दिखने वाली भीड़भाड़ भी शुक्रवार को नहीं थी। वहीं सालों से काम कर रहे इन बेरोजगार युवकों को भी आज अचानक भगाने का कारण भी नहीं बताया गया।
रजिस्टर मेंटेन होता है इन युवकों का
आरटीओ दफ्तर में काम कर रहे इन बेरोजगार युवकों का सरकारी कर्मचारी रजिस्टर मेंटेन करते रहे हैं। इनकी उपस्थिति और अनुपस्थिति के हिसाब से ही इनका भुगतान किया जाता रहा है।
मुश्किल है काम कर पाना
आरटीओ दफ्तर में अवैध रूप से काम कर रहे इन युवकों से काम लेने की सरकारी कर्मचारियों की ऐसी आदत पड़ चुकी है कि अब इनके बिना काम कर पाना इनके लिए कठिन है। यह स्थिति शुकवार को आरटीओ कार्यालय में साफ नजर आई।