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Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ट्रेवल एलाउंस के बकाया भुगतान तथा उसके ब्याज के लिए दायर याचिका की सुनवाई करते हुए स्वास्थ्य विभाग को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर छह सप्ताह में निराकरण करने के आदेश दिए हैं।
याचिका के मुताबिक जिला अस्पताल के रेडियोलाजिस्ट एसके तिवारी को वर्ष 1984 से 1990 तक के लिए ट्रेवल एलाउंस प्राप्त होना था। इस अवधि में एलाउंस नहीं मिलने पर याचिकाकर्ता ने स्वास्थ्य विभाग को अभ्यावेदन प्रस्तुत किया। इस पर विचार नहीं होने पर उन्होंने वकील समीर बेहरा के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए 3 जनवरी 2007 को विभाग को याचिकाकर्ता के ट्रेवल एलाउंस का भुगतान करने के आदेश दिए।
हाईकोर्ट के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने बतौर एलाउंस 31727 रुपए का भुगतान किया। याचिकाकर्ता ने एलाउंस के भुगतान की अवधि का ब्याज दिलाने के लिए पुन: याचिका प्रस्तुत की। इस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि जब स्वास्थ्य विभाग ने रेडियोलाजिस्ट के ट्रेवल एलाउंस को उचित मानते हुए बकाया राशि का भुगतान कर दिया है, तब याचिकाकर्ता के ब्याज के अभ्यावेदन का छह सप्ताह में निराकरण करना चाहिए।
रिटायर्ड कर्मी पद के समकक्ष कोर्ट में पैरवी नहीं कर सकेंगे
बिलासपुर. सरकारी नौकरी से रिटायर्ड होने वाले लॉ ग्रेजुएट आमतौर पर काला कोट धारण कर बाकी की जिंदगी आराम से वकालत में गुजारने लगते थे। इस काम में वे अपनी पूर्व सेवा वाले विभाग में पहुंच का लाभ भी आसानी से उठा लेते थे, परंतु अब रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए वकालत करना मुश्किल होगा। नए नियमों के मुताबिक अब कोई भी रिटायर्ड शासकीय सेवक अपने पद के समकक्ष, बराबर या उससे नीचे की कोर्ट में वकालत नहीं कर सकेंगे।
इससे पहले कोई भी न्यायालयीन कर्मचारी या अन्य विभागों के शासकीय सेवक अपनी पदस्थापना वाले क्षेत्रों में क्षेत्र जहां वह तीन वर्षो से पदस्थ रहे हों, दो वर्ष तक प्रेक्टिस नहीं कर सकते थे, लेकिन अवधि बीतने के बाद वे वापस अपने क्षेत्र में वकालत कर सकते थे। बार कौंसिल की इस बाध्यता में अब परिवर्तन कर दिया गया है। नए नियम के प्रकाश में अब रिटायर्ड शासकीय सेवक को इस प्रकार की छूट बिल्कुल भी नहीं रहेगी।
राजस्थान स्टेट बार कौंसिल ने बार कौंसिल आफ इंडिया को बार कौंसिल आफ इंडिया के रूल -7 में संशोधन करने के लिए प्रस्ताव रखा था। इसमें शासकीय सेवक के अपने समकक्ष, बराबर या उससे नीचे के पद वाले कोर्ट में प्रेक्टिस पर हमेशा के लिए पाबंदी लगाने का प्रस्ताव शामिल था। बार कौंसिल आफ इंडिया ने इस प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है।
स्टेट बार कौंसिल में 250 वकीलों का पंजीयन
बिलासपुर. स्टेट बार कौंसिल की तीन सदस्यीय पंजीयन समिति ने 31 दिसंबर 2007 की तारीख पर 250 वकीलों के पंजीयन पर अपनी मुहर लगा दी। खास बात यह है कि इस प्रकार पंजीयन के सभी सदस्य स्थानीय होने के कारण बार कौंसिल को टीए-डीए आदि के रूप में कोई राशि खर्च नहीं करनी पड़ी। इससे पहले पंजीयन समिति के गैर स्थानीय सदस्य प्रति बैठकों के हिसाब से ट्रेवल एलाउंस वसूल करते थे। कौंसिल की पंजीयन समिति में एडवोकेट पंकज श्रीवास्तव, टीआर निराला एवं शैलेंद्र दुबे शामिल हैं।