बीकानेर. नगर परिषद के पार्षदों को भत्ता देने की व्यवस्था पिछले पांच महीने से गड़बड़ाई हुई है। भत्ते के रूप में महज 1575 रुपए की राशि दो-दो महीने के अंतराल में एक साथ मिल रही है। परिषद का कहना है कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से पार्षदों को भुगतान नहीं किया जा रहा है जबकि पार्षदों का आरोप है कि अधिकारी अपना कमीशन बनाने के लिए बड़े-बड़े भुगतान कर रहे हैं लेकिन पार्षदों का भत्ता रोके हुए हैं।
जानकारी के अनुसार पार्षदों को पिछले पांच महीने से नियमित रूप से भत्ता नहीं मिल रहा है। पार्षदों का कहना है कि यह राशि बहुत कम है लेकिन फिर भी परिषद को यह देखना चाहिए कि कुछ पार्षदों को इस राशि की काफी जरूरत होती है। स्टेशनरी, यात्रा व्यय और टेलीफोन खर्च के नाम पर मिलने वाले 1575 रुपए कुछ पार्षदों की जरूरत भी हो सकते हैं। ऐसे में पार्षदों को भत्ता रोकना ठीक बात नहीं है।
पार्षद बाबूलाल गहलोत का आरोप है कि नगर परिषद में जानबूझकर भत्ता रोका जा रहा है ताकि पार्षद दूसरे मसलों पर बात नहीं करे और भत्तों का ही मुद्दा उठाते रहें। परिषद की आर्थिक स्थिति को सिर्फ बहाना बताते हुए गहलोत ने कहा है कि अगर परिषद की आर्थिक स्थिति खराब है तो फिर ठेकेदारों को चेक क्यों काटे जा रहे हैं।
उधर, नगर परिषद सभापति मकसूद अहमद ने कहा है कि पार्षदों के भत्ते बकाया रहने की वजह कुछ आर्थिक कठिनाइयां थी जिसका समाधान कर दिया गया है। एक-दो दिन में ही बकाया चेक जारी कर दिए जाएंगे।
आलम-ए-तंगहाली
नगर परिषद में इन दिनों आर्थिक संकट गहराया हुआ है। सूत्रों का कहना है कि परिषद की देनदारियां बढ़ती जा रही है जबकि आय के स्रोत बिल्कुल भी नहीं है। इस वजह से पिछले दिनों निविदाएं निकालने के नाम पर अधिकारियों में बहस भी हुई थी।
पार्षदों को बार-बार यही कहा जा रहा था कि परिषद में पैसा आने के साथ ही चेक जारी कर दिया जाएगा लेकिन इसी बीच कुछ ठेकेदारों को चेक काटने के कारण पार्षद आक्रोशित हो गए। पार्षदों के आक्रोश को देखते हुए बिल बनाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।