HomeNewsRajasthanBikaner Bikaner

31 साल बाद मिली चार्जशीट

बीकानेर. इंदिरा गांधी नहर के मैन कैनाल पर 1972 में तैनात एईएन कालूराम अब अधीक्षण अभियंता बन गए। डीपीसी होने पर वे अतिरिक्त मुख्य अभियंता बनने की कतार में भी खड़े हैं, साथ ही छह महीने बाद उनकी सेवानिवृत्ति भी है लेकिन सरकार ने 31 साल बाद उन्हें एक मामले में चार्जशीट दे दी जिससे उनकी पदोन्नति रुक गई।

मामला चार्जशीट को लेकर चर्चा में नहीं है बल्कि डीओपी विभाग की कार्य गति को लेकर जरूर चर्चा में है। दरअसल 1972 में कालूराम मैन कैनाल पर बतौर एईएन तैनात थे। सड़क बनाने के एक कार्य को ठेकेदार छोड़कर चला गया था। इस मामले को लेकर डीओपी ने कालूराम को 2003 में चार्जशीट दी। तब तक वह अधीक्षण अभियंता बन चुके थे।

जनवरी में उन्हें अतिरिक्त मुख्य अभियंता बनना था लेकिन उनकी पदोन्नति इसलिए रुक गई क्योंकि अब उन्हें चार्जशीट मिल गई है। खास बात यह है कि जो ठेकेदार काम छोड़कर भाग गया था सरकार ने दंड नहीं देते हुए 1977 में उसे चार बार रनिंग पेमेंट कर दिया।

जानकार बताते हैं कि कालूराम को इस मामले में चार्जशीट इसलिए दी गई क्यों कि जो अभियंता दोषी था वह अब सेवानिवृत्त हो गया। इसलिए किसी न किसी को दोषी ठहराना था इसलिए कालूराम को निशाना बना लिया गया। कालूराम को मिली चार्जशीट को लेकर अन्य उच्चाधिकारी भी संशय में है लेकिन डीओपी के आगे कोई बोलने को तैयार नहीं।

विभाग के पुराने अधिकारी बताते हैं कि इस तरह के मामलों पर विचार करने वाली हाईपॉवर कमेटी पब्लिक अकाउंट कमेटी (पीएसी) है जिसने कई वर्ष पूर्व ही वसूली करने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए लिखा था न कि काम कराने वाले अधिकारी के खिलाफ।

कालूराम कार्य संचालन की व्यवस्था में थे। कालूराम को एक जनवरी को अतिरिक्त मुख्य अभियंता बनना था लेकिन चार्जशीट के कारण उनकी पदोन्नति रुकी हुई है। अभियंता एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारी इसे अधिकारियों को परेशान करने वाला कृत्य मानते हैं।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: