जोधपुर. राष्ट्रीयकृत बैंकों में अन्य केंद्रीय विभागों की तुलना में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है। यह चौंकाने वाले तथ्य सीबीआई मामलात की विशेष अदालत में विचाराधीन प्रकरणों की संख्या से सामने आए हैं। जोधपुर स्थित सीबीआई मामलात की विशेष अदालत में भ्रष्टाचार के सर्वाधिक मुकदमे बैंकों के खिलाफ चल रहे हैं।
इस अदालत में लंबित 78 मामलों में से 20 से ज्यादा बैंकों के खिलाफ विचाराधीन हैं। इन घपलों में बैंक प्रबंधक, फील्ड ऑफिसर, कैशियर, सहायक व प्राइवेट लोग लिप्त हैं। बावजूद इसके लोन के मामलों में ऋणी की मजबूरी के चलते रिश्वत की न तो शिकायत होती है और न ही भ्रष्टाचार का खुलासा।
कौन-कौनसी बैंकें लिप्त
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, -स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, ऑरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, यूनियन बैंक, यूको बैंक, विजया बैंक, थार आंचलिग ग्रामीण बैंक, जयपुर नागौर ग्रामीण बैंक, मारवाड़ ग्रामीण बैंक
एलसी में हेरफेर
एसबीआई, उदयपुर, बड़गांव शाखा के तत्कालीन बैंक प्रबंधक से मिलीभगत कर एलसी में हेरफेर कर मुंबई की एक कंपनी ने 81 लाख 51 हजार 677 रुपए का माल उठा लिया।
फर्जी पट्टों से लोन
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की उम्मेदनगर शाखा के तत्कालीन मैनेजर व फील्ड ऑफिसर ने प्राइवेट लोगों से षडयंत्र कर मृत लोगों की जमीन के फर्जी पट्टों के जरिए करीब 4 लाख रुपए का लोन दे दिया।
मैनेजर ने हस्ताक्षर कर रुपए उठा लिए
थार आंचलिक ग्रामीण बैंक के तत्कालीन प्रबंधक व कैशियर ने खाताधारकों के फर्जी हस्ताक्षर कर सात लाख रुपए उठा लिए।
लाटरी का शौकीन
एसबीबीजे, जैसलमेर के तत्कालीन स्पेशन एसिस्टेंट को लाटरी टिकट खरीदने का शौक था। उसने जोधपुर के तीन लाटरी विक्रेताओं के खाते अपनी शाखा में खोल दिए व फोन पर लाटरी के टिकट खरीदकर दूसरों के खातों से रुपए लाटरी विक्रेताओं के खातों में ट्रांसफर कर देता था।
बीएसएनएल में भी भ्रष्टाचार का संचार
भारत संचार निगम लि. भी भ्रष्टाचार की दूसरी पायदान पर खड़ा है। इस विभाग के आला अधिकारियों के खिलाफ करीब 15 मामले सीबीआई कोर्ट में विचाराधीन हैं। इस विभाग के डिवीजनल इंजीनियर, डिप्टी जीएम, एसडीओ, जेटीओ व कई ठेकेदार भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। इन अधिकारियों ने एक ही नाली में दो केबल डाकर दो नालियों का पैसा उठा लिया। वहीं कई मामलों में ऊंची दर पर ठेका देकर विभाग को लाखों रुपयों का चूना लगा दिया।
रेलवे भी पीछे नहीं
भ्रष्टाचार की तीसरी पायदान पर खड़े रेलवे के कर्मचारियों के खिलाफ सात से ज्यादा मामले विचाराधीन हैं। इन मामलों में रेल पथ निरीक्षक, स्टेशन मास्टर, अभियंता व रेलवे अस्पताल के फार्मासिस्ट तथा दवा विक्रेता लिप्त हैं।
लोकल परचेज में घपला
जोधपुर रेलवे अस्पताल कर्मचारियों ने प्राइवेट मेडिकल स्टोर से दवाइयों के फर्जी बिल बनवाकर लोकल परचेज में 30 लाख रुपए से ज्यादा की धांधली की।
खाली बिल्टी चुराकर 78 लाख का चूना
रेलवे स्टेशन मास्टर की मिलीभगत से पंचकोषी व शेरगढ़ रेलवे स्टेशनों से खाली बिल्टी चुराकर फर्जी रूप से तैयार कर ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स की गंगानगर व हनुमानगढ़ शाखाओं से हनुमानगढ़ के कोठारी ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक ने बैंक से 78 लाख रुपए फर्जी रूप से उठा लिए, जिन्हें चुकता नहीं किया।
और भी हैं कतार में
कस्टम के कमिश्नर ऑफ कस्टम, इंस्पेक्टर, एप्रेजर व केंद्रीय उत्पाद शुल्क के अधीक्षक, दूरदर्शन के एसिस्टेंट डायरेक्टर, टेक्नीनिशयन व कैशियर, नारकोटिक्स के जिला अफीम अधिकारी, सब इंस्पेक्टर व सिपाही, आयकर विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर व लिपिक, एमईएस का एक अधीक्षण अभियंता, केंद्रीय शुष्क अनुसंधान केंद्र का निदेशक, श्रम प्रवर्तन सहायक, सहायक पोस्ट मास्टर, सेंट्रल कॉटन परचेज ऑफिसर, एयरपोर्ट ऑथोरिटी के स्टेशन प्रबंधक व केंद्रीय खादी ग्रामोद्योग विकास संस्थान के फील्ड ऑफिसर के भी हाथ भ्रष्टाचार से रंगे हैं।