जोधपुर. शहर की निजी स्कूलों में सबसे पुरानी एसपीएस स्कूल में अपनी लाडली को प्रवेश दिलाने के लिए उतावले लोगों को गुरुवार की कड़ाके की ठंड में कतार में खड़े रहना पड़ा। अप्रेल 2008 से शुरू होने वाले नए शिक्षा सत्र के लिए इस स्कूल में 110 सीटों पर प्रवेश के लिए एक हजार फार्म बेचे गए।
एसपीएस स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए गुरुवार आधी रात को ही नन्ही बच्चियों के परिजन आकर बैठ गए। शुक्रवार सुबह 7 बजे से 9 बजे तक ही प्रवेश फार्म मिलने की सुविधा और निश्चित संख्या में ही फार्म देने की व्यवस्था ने हजारों अभिभावकों को परेशानी में डाल दिया।
जिला प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारी भी अपनी लाडली को प्रवेश दिलवाने के लिए यही प्रक्रिया अपना रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी लंबे समय से यह कहकर कन्नी काटते रहे कि उनके पास निजी स्कूलों के विरुद्ध कार्रवाई करने का अधिकार ही नहीं है।
कतार लगी रेलवे स्टेडियम तक
देर रात डेरा डाले लोग जैसे-जैसे बढ़ते गए महिलाओं और पुरुषों की अलग कतार बनती गई। सुबह आवेदन खिड़की खुलने से पहले स्कूल की खिड़की से लेकर रेलवे स्टेडियम तक कतार लगी हुई थी। परिजनों का कहना है कि मात्र दो घंटे ही सीमित फार्म देने की नीति से उन्हें मुश्किल उठानी पड़ रही है।
फार्म से एक लाख की आय
एसपीएस स्कूल को सौ रुपए प्रति फार्म के हिसाब से हजार आवेदन फार्म से ही एक लाख रुपए की आय हो जाती है।
बच्चों को भी ले आए
स्कूल व्यवस्थापकों द्वारा सही उत्तर नहीं देने के कारण भ्रमित रहे कुछ अभिभावक अपनी मासूम बच्चियों को भी साथ लेकर आ गए। कड़ाके की ठंड में इन मासूमों को ठिठुरते सहज ही देखा जा सकता था।
नियम यही रहेंगे
कई परिजनों ने फार्म नहीं मिलने पर स्कूल प्रबंधकों से मिलकर रातभर जागने और प्रवेश फार्म नहीं देने की नीति को गलत ठहराया तो जवाब मिला नियम तो यही रहेंगे, इसी कारण तो स्कूल की इमेज बनी हुई है।
>> निजी स्कूलों में प्रवेश दिलवाने और रोकने का अधिकार विभाग के पास नहीं है,इन स्कूलों की अपनी नीति है,इसमें हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते।
अशोक कुमार विश्नोई, शैक्षिक प्रकोष्ठ अधिकारी, माध्यमिक शिक्षा जोधपुर