News
Indians Abroad Indians Abroad लंदन.हायर एजुकेशन के लिए ब्रिटेन जाने वाले इंडियन स्टूडेंट्स की ईमानदारी, टीचर्स के प्रति उनके सम्मान और अध्ययनशीलता के लिए ब्रिटिश विश्वविद्यालय भी उनके कायल हैं। इंग्लिश प्रोनंसिएशन में कमजोरी के बावजूद भारतीय छात्रों के इन्हीं गुणों के चलते अधिकांश विश्वविद्यालय उन्हें दाखिला देने को तत्पर रहते हैं।
गौरतलब है कि पढ़ाई के लिए ब्रिटेन आने वालों में पंजाब, दिल्ली, मुंबई और गुजरात के छात्रों की संख्या अधिक होती है। ब्रिटिश प्रोफेसरों का मानना है कि इंडियन स्टूडेंट्स को पढ़ाई के साथ खेलकूद, समाजसेवा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी भाग लेना चाहिए।
प्रवेश की शर्त :
ब्रिटिश यूनिवर्सिटी में प्रवेश के लिए इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम में कम से कम 6 मार्क्स पाना जरूरी होता है।
भारतीय छात्रों की पसंद :
मिडिलसेक्स यूनिवर्सिटी में सबसे अधिक करीब 800 भारतीय छात्र पढ़ते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रीनविच में आठ साल पहले केवल 16 भारतीय छात्र थे, जो अब बढ़कर करीब 700 हो गए हैं। एक आंकड़े के मुताबिक इस साल हायर एजुकेशन के लिए भारत से करीब 19 हजार स्टूडेंट्स आए हैं।
आत्मविश्वास जरूरी :
डेविस के अनुसार, अंग्रेजी अच्छी होने के बावजूद भारतीय छात्र आत्मविश्वास की कमी से प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन देने में खास सफल नहीं रहते।
बेहतर प्रदर्शन के लिए :
यहां के प्रोफेसरों का मानना है कि ब्रिटिश शिक्षा पद्धति में खुद को ढालने के लिए भारतीय छात्रों को झिझक छोड़कर और जिज्ञासु बनना होगा। उन्हें शिक्षकों से ज्यादा सवाल करने चाहिए। ताकि वे उनसे अधिकाधिक जानकारियां बटोर सकें।