कोटा.
गैर शैक्षणिक कार्यो में शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 6 जनवरी को होने वाले पल्स पोलियो अभियान में शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई है। भले ही यह अभियान सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षकों को दिए गए 7 कार्र्यो में शामिल है, लेकिन पांच दिन के इस अभियान से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित तो होगी।
शहर में कई स्कूल तो ऐसे हैं जहां के अधिकांश शिक्षकों की ड्यूटी लगने से स्कूल बंद रहने जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी। एक या दो बचे हुए शिक्षकों के पास ही पूरे स्कूल की जिम्मेदारी आ गई है। उन्हें ही बच्चों को पढ़ाना भी है और पोषाहार भी बनाना है।
खास बात यह है कि जिले के कितने शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जा रही है या लगाई गई है, इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारियों के पास कोई सूचना नहीं है। शहर की सभी डिस्पेंसरी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों ने अपने क्षेत्र के स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को शिक्षकों की ड्यूटी लगाने के आदेश अपने स्तर पर ही दिए हैं। इन आदेशों के आधार पर स्कूलों के अधिकतर शिक्षकों को अभियान में लगा दिया गया है।
इससे स्कूलों में शेष रहे एक या दो शिक्षकों पर ही पूरे स्कूल की जिम्मेदारी आ गई है। इस पर यह है कि स्कूल भी खुलने जरूरी हैं। स्थिति यह है कि अगर स्कूल नहीं खोले गए तो शिक्षा विभाग को जबाव देना पड़ता है और अभियान में नहीं गए तो अनुशासनात्मक कार्रवाई का डर है।
अभियान के लिए शिक्षकों को 5 जनवरी को उपस्थित होना है। वे 8 जनवरी तक अभियान में लगे रहेंगे। यानी पांच दिन तक शिक्षण कार्य पूरी तरह से प्रभावित रहेगा। प्रारंभिक शिक्षा के अलावा माध्यमिक शिक्षा से भी काफी व्याख्याताओं को भी इस अभियान में लगाया गया है। जबकि दो महीने बाद ही बोर्ड की परीक्षाएं होनी है।
कहां-क्या स्थिति
घोड़े बाबा बस्ती प्रा. वि. में 7 में से 5 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई। शेष दो में से एक भी सर्वशिक्षा अभियान के प्रशिक्षण में है। एक ही शिक्षक के भरोसे है स्कूल, जिसे स्कूल भी संभालना है और पोषाहार भी बनाना है। इसी प्रकार रामपुरा के प्रा.वि. में 5 में से 3 अध्यापक लगाए। रामपुरा के महात्मा गांधी स्कूल में से 7, केशवपुरा उ.मा.वि. में 5 शिक्षक लगाए।
दिसंबर से ही बंद है पढ़ाई
दिसंबर से वैसे ही स्कूलों में अर्धवार्षिक परीक्षा व शीतकालीन छुट्टियों के कारण पढ़ाई बंद पड़ी थी। अब शिक्षकों की पल्स पोलियो अभियान में ड्यूटी लगने से भी स्कूलों में पढ़ाई का माहौल नहीं बन पाएगा। इसके लिए 29 दिसंबर से प्रशिक्षण चल रहा है, शुक्रवार को प्रशिक्षण का अंतिम दिन था।
इसके बाद भी शेष रहे शिक्षकों का प्रशिक्षण शनिवार को होगा। रविवार को पल्स पोलियो अभियान के तहत छोटे बच्चों को पोलियो की दवा देनी होगी। इसी के साथ 7 और 8 जनवरी को घर-घर जाकर पोलियो की दवा देने के लिए सर्वे भी शिक्षकों को करना होगा।
व्याख्याताओं को ड्रॉप पिलाने में लगाना गलत
>> जिले के माध्यमिक विद्यालय के संस्था प्रधानों द्वारा वरिष्ठता क्रम और कनिष्ठ वर्ग को छोड़कर सीधे व्याख्याताओं को इस कार्य में तैनात कर दिया गया है। व्याख्याता वर्ग का इस प्रकार पोलियो की दवा पिलाने में ड्यूटी लगाना गलत है।
राजेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष,राजस्थान शिक्षा सेवा प्राध्यापक संघ (रेसला)
शैक्षणिक माहौल प्रभावित
>> सुप्रीम कोर्ट ने गैर शैक्षणिक कार्र्यो में पल्स पोलियो अभियान को भी जोड़ा है, जिसमें शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जा सकती है। लेकिन इसमें भी यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि स्कूल और बच्चों की दिनचर्या प्रभावित नहीं हो। स्कूलों में एक या दो टीचर रहने से पढ़ाई तो प्रभावित होनी ही है। यह भी गलत है कि बिना शिक्षा अधिकारियों की जानकारी के ही शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी जाती है।
सुरेश गौतम, जिलाध्यक्ष, शिक्षक संघ (राष्ट्रीय)
प्रधानाध्यापकों ने लगाई ड्यूटी
>> अभियान में हम शिक्षकों का सहयोग जरूर लेते हैं, लेकिन उनकी ड्यूटी स्कूलों के प्रधानाध्यापक ही लगाते हैं। इसके लिए शहर की सभी डिस्पेंसरी के प्रभारी सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को अभियान की जरूरत के मुताबिक शिक्षकों की डिमांड करते हैं, जिसके आधार पर वे उनकी ड्यूटी लगाते हैं।
डॉ. हेमेंद्र विजयवर्गीय, नोडल अधिकारी, पल्स पोलियो अभियान