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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़ .कत्ल, वाहन चोरी, स्नैचिंग, शराब की तस्करी, बलात्कार, एक्सीडेंट, रिश्वतखोरी, मारपीट और डकैती की वारदातें बढ़ीं..फिर भी आईजी शांति कुमार कहते हैं कि चंडीगढ़ पुलिस नंबर वन है। आईजी को इतनी भी जानकारी उनके अफसरों ने नहीं दी कि बुड़ैल जेल ब्रेक केस की जांच उनकी पुलिस कर रही है या सीबीआई। उनसे पूछा गया कि आखिर केस का स्टेटस क्या है, तो वे बोले ‘सीबीआई से पूछो जांच वही कर रही है।’ बाद में अफसरों को लगा कि आईजी गलत बोल गए, तो डीएसपी विजय ने माइक लेकर कहा कि भगोड़े आतंकी तारा और देवी की तलाश जारी है।
यह वाकया सेक्टर-२६ की पुलिस लाइन में बुलाई गई एनुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस का है। इसमें आईजी के अलावा डीआईजी विवेक गोगिया, एसएसपी ट्रैफिक अतर सिंह अहलावत और एसएसपी यूटी सुधांशु श्रीवास्तव मौजूद थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईजी ने कहा कि पुलिस ने छोटी से छोटी वारदात पर मामला दर्ज किया है, जिससे क्राइम ग्राफ बढ़ा। हालांकि इस साल कम हुई रिकवरी के बारे में आईजी कोई दलील नहीं दे सके। पुलिस की ट्रांसफर और पोस्टिंग पर जब बात हुई, तो आईजी ने कहा कि वह १क् तारीख को नई ट्रांसफर्स करने जा रहे हैं। इसमें सीवीसी के नियमों को ही ध्यान में रखा जाएगा। किसी को भी दो साल से ज्यादा एक पोस्ट पर नहीं रहने दिया। जबकि डीएसपी साउथ केआईपी सिंह एक ही पोस्ट पर दो साल तीन महीने से तैनात हैं।
जब हुई पुलिस वेलफेयर की बात
असल में पुलिस वेलफेयर के लिए इस साल आला अधिकारियों ने पूरा जोर दिया। फ्री मेडिकल कैंप, योगा क्लासे लगरई, उनके परिवार वालों के लिए कोचिंग क्लासे शुरू कीं। बावजूद इसके पुलिस का मनोबल काफी गिरा। कारण रहा सीबीआई के हाथों कई बार पिटाई। इस बार निर्दोष हेड कांस्टेबल को वूमन सेल में सीबीआई कर्मियों ने पीटा। डीएसपी ने चुपचाप उसकी पिटाई होते देखी। बाद में हेड कांस्टेबल को लेकर एसएसपी सुधांशु श्रीवास्तव को शिकायत दी। तो हेड कांस्टेबल की शिकायत पर कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई गई और हेड कांस्टेबल को कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को बोला गया। इससे अफसरों की इमेज पुलिस के निम्न अधिकारियों में काफी कमजोर पड़ी।
‘हमने किए बदलाव’
आईजी ने बोला कि उन्होंने इस साल कई ऐसे कर्मियों को एसएचओ का पदभार सौंपा, जिन्हें कभी ऐसा मौका नहीं मिल सका ताकि फोर्स का मनोबल भी बढ़ेगा। जबकि असल में आईजी के इस प्रयास से मनोबल काफी कम हुआ।
>> पहले प्रयास में आईजी ने इंस्पेक्टर गुलशन कुमार को थाना-३९ का एसएचओ तैनात किया। नतीजा यह हुआ कि खुद तत्कालीन एसएसपी दिनेश भट्ट को उन्हें सस्पेंड करना पड़ा। डेढ़ महीने के कार्यकाल में इसी थाने के दो एएसआई सीबीआई के हाथों पकड़े गए।
>> दूसरे प्रयास में आईजी ने इंस्पेक्टर बिशी राम को थाना मनीमाजरा का एसएचओ तैनात किया। इन्हें भी हफ्ता वसूली करते सीबीआई ने पहले महीने ही दबोच लिया।
>> तीसरा प्रयास अब इंस्पेक्टर दविंदर शर्मा को थाना-३६ प्रभारी तैनात किया गया है। पिछले एक महीने में उनके थाना क्षेत्र से २९ वाहन चोरी की वारदातें हरुई। रेस्तरां में गोलियां चलीं जिसे पुलिस को पता तक नहीं चला।
एक्सटेंडेंट हनीमून?एसएसपी सुधांशु श्रीवास्तव ने जब जॉइन किया था तो वह बोले थे कि यह समझो कि वे एक महीने तक हनीमून पर हैं। इस दौरान वह पुलिस की कारगुजारी पर नजर रखेंगे। फिर दिखाएंगे अपनी कार्रवाई। पता नहीं यह हनीमून कब खत्म होगा, जबकि एसएसपी को अब जॉइन किए करीब तीन महीने हो चुके हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरे साल में सबसे ज्यादा चोरी की वारदातें पिछले साल हरुई। कई बार पुलिस की लापरवाहियां सामने र्आई, लेकिन अफसरों की जगह छोटे मुलाजिमों पर कार्रवाई होती रही।
एक नजर क्राइम ग्राफ परवर्ष 2006 2007
कत्ल-१२ १९, अनसॉल्व २
मारपीट-५५ ७८, अनसॉल्व ६२
दंगे-४४ ७९, अनसॉल्व ७
लूट-३४ ३७, अनसॉल्व ६
स्नैचिंग-११८ १७९, अनसॉल्व ११क्
चोरी-१८९ १९१, अनसॉल्व १३२
वाहन चोरी-५२९ ८५२, अनसॉल्व ६४२
अन्य चोरी-७क्५ ८८८, अनसॉल्व ५क्७
रेप-१९ २२, अनसॉल्व ३