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प्रदेश के शराब ठेकेदार तस्करी से परेशान

करनाल. प्रदेश की नई आबकारी नीति को लेकर शुक्रवार को पंचायत भवन में प्रदेशभर के ठेकेदारों की बैठक हुई। बैठक में आबकारी एवं कराधान विभाग के आला अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने ठेकेदारों के विचार फाइलों में दर्ज किए। पांच जनवरी को चंडीगढ़ में होने वाली बैठक में इन विचारों पर मंथन किया जाएगा। बैठक में अधिकांश ठेकेदार सरकार की आबकारी नीति से खिन्न नजर आए। ठेकेदारों का कहना है कि प्रदेश में जमकर शराब क तस्करी हो रही है, जबकि संबंधित विभाग मूक दर्शक बना हुआ है। वहीं कुछ ठेकेदारों ने यहां तक कहा कि नई नीति उन्हें रास ही नहीं आ रही है। अंग्रेजी शराब के ठेकेदारों का कहना था कि तस्करी रुकवा दी जाए तो ठेके सही चल सकते हैं। यदि यही हाल रहा तो इस बार कोई भी ठेकेदार ठेकों के फार्म नहीं लगाएगा। जबकि कुछ ठेकेदारों ने एल-13 से राशि वापस लेने के बारे में भी आबकारी विभाग के आला अधिकारियों से शिकायत की।

पांच को ही होगा फैसला : ईटीसी :

आबकारी एवं कराधान विभाग के ईटीसी अरुण कुमार ने कहा कि अभी ठेकेदारों के व्यूज लिए गए हैं। पांच जनवरी को बैठक होगी। इसमें प्रदेशभर के सभी डीईटीसी शिरकत करेंगे। इसके बाद ही कोई फैसला हो सकेगा। नई आबकारी नीति को अंतिम रूप केबिनट की बैठक में ही दिया जाएगा।

घट सकती है ठेकों की संख्या : इस बार ठेकेदारों के व्यूज व आला अधिकारियों की बात व कागजों पर ध्यान दिया जाए तो प्रदेश में शराब ठेकों की संख्या घटेगी, क्योंकि कस्बों व शहरों में कई स्थानों पर अंग्रेजी व देसी शराब के ठेके एक साथ चलाए जाएंगे, ताकि रेट को लेकर किसी तरह का विवाद न हो। ग्रामीण आंचल में देसी शराब के ठेकों पर बिकने वाली बीयर शराब इस बार भी बदस्तूर बिकती रहेगी। वहीं कुछ ठेकों को बंद किया जा रहा है।

एमआरपी पर होगा विचार : बैठक में यह बात भी सामने आई है कि दिल्ली व अन्य प्रदेशों की तर्ज पर शराब की बोतल पर रेट लिख दिया जाए, जिसके बाद ठेकेदार बोतल को प्रिंट रेट पर बेचें, इससे तस्करों पर नकेल लग सकती है।





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