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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. विधायक खरीद फरोख्त मामले में आयकर विभाग ने वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पाण्डेय को नोटिस भेजा है। श्री पाण्डेय ने 45 लाख रुपए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बताकर आर्थिक अपराध ब्यूरो को सौंप दिए थे। आयकर विभाग ने इस पैसे को श्री पांडे की आय माना है।
इधर, श्री पांडे ने आयकर विभाग की नोटिस मिलने के बाद शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस लेकर पूरे मामले को केंद्र सरकार की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा करार दिया।श्री पांडेय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की यूपीए सरकार पार्टी के नेता श्री जोगी को बचाने के लिए उन्हें शिकंजे में लेने का प्रयास किया है। आयकर विभाग केंद्र सरकार द्वारा ही नियंत्रित है।
श्री पांडे ने कहा कि केंद्र ने ऐसा इसलिए किया, ताकि आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को विधायक खरीद-फरोख्त कांड से नुकसान न उठाना पड़ जाए। श्री पांडेय ने बताया कि आयकर विभाग ने उन्हें जारी नोटिस में 21,41,262 रुपए टैक्स अदा करने के निर्देश दिए हैं। इसमें 45 लाख रुपए का टैक्स 14,76,732 और उसका ब्याज 6,64,530 रुपए शामिल है। विभाग ने टैक्स जमा कराने के लिए श्री पांडे को एक माह का वक्त दिया है।
कांग्रेस के दबाव की वजह से पूरा मामला अटका है। सीबीआई चार साल बाद भी कोर्ट में चालान पेश नहीं कर रही है, जबकि टेलीफोन पर रिकार्ड आवाज को सीबीआई ने श्री जोगी से मैच कर लिया है। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उल्टे शिकायत करने वाले को परेशान किया जा रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत ने सीबीआई डायरेक्टर के नाम सम्मन जारी किया था।
इसे बदलकर डायरेक्टर की जगह एसपी कर दिया गया। कांग्रेस राज्य में अपने सांसद को बचाने के लिए उनके खिलाफ साजिश रच रही है। कांग्रेस मामले को दबाने के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकती है। श्री पांडे ने कहा कि वे आयकर अदा नहीं करेंगे और इस मामले में अपील करेंगे।
क्या था मामला
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई थी। तब भाजपा ने आरोप लगाया था कि पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने उनकी पार्टी के विधायकों को खरीदने के लिए षड़यंत्र रचा, पीआर खुंटे के माध्यम से बलीराम कश्यप और वीरेंद्र पांडे से संपर्क साधा और विधायकों को खरीदने के लिए रेडिएंट स्कूल के पास 45 लाख रुपए का भुगतान श्री पांडे को किया। श्री पांडे ने ये रुपए एकात्म परिसर में आनन-फानन में बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में रखे थे, फिर यह रकम ईओडब्लू में जमा करा दी थी।