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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. सरकारी और निजी स्कूलों में शिक्षा कहां महंगी पड़ रही है, एससीईआरटी ने इसका सर्वे शुरू किया है। सर्वे के शुरुआती दौर में ही यह बात सामने आ रही है कि गांवों में सरकारी स्कूलों के मुकाबले निजी स्कूलों में शिक्षा सस्ती पड़ रही है।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीआरटी) ने सरकारी और निजी स्कूलों में फर्क जानने एक सर्वे करा रही है। इसमें यह भी पता किया जाएगा कि सरकारी स्कूल में पढ़ाई सस्ती है या निजी स्कूलों में। इस सर्वे में एक महीने का समय और लगने की संभावना है। पहले चरण में गांव के स्कूलों को लिया गया है।
एससीईआरटी ने इसकी जिम्मेदारी आलोक शर्मा को दी है। उनकी टीम स्कूलों में जाकर तथ्य जुटा रही है। दिसंबर में दल ने राजधानी सहित दूसरे जिलों के स्कूलों में गई। वहां छात्रों की संख्या और उनके ऊपर किए जाने वाले खर्च का हिसाब लगाया गया। यह भी देखा जा रहा है कि बच्चों को कितनी सुविधाएं मिल रही हैं। प्रारंभिक सर्वे में कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए। गांव के निजी स्कूल कम खर्च में ज्यादा अच्छे नतीजे दे रहे हैं।
इनके बजाए सरकारी स्कूल मोटी राशि खर्च करने के बावजूद फिसड्डी साबित हो रहे हैं। सिलतरा के जगमोहन लाल हायर सेकेंडरी स्कूल, परसतराई के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल और शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल मांढ़र में सर्वे किया गया है। निजी स्कूल कम संसाधन और कम शिक्षकों से ज्यादा काम कर रहे हैं। वहीं सरकारी स्कूलों में संसाधनों पर अधिक खर्च होता है। सिलतरा के निजी स्कूल में 483 छात्र हैं।
वहां प्रति छात्र पर 162 रुपए प्रतिमाह खर्च होते हैं, जबकि परसतराई के शासकीय स्कूल में एक छात्र पर खर्च 363 रुपए आया। सालभर के खर्च को देखें तो सितलरा के निजी स्कूल में 9.39 लाख रुपए खर्च हुए। वहीं परसतराई स्कूल में 19.90 लाख रुपए खर्च हुए। मांढ़र के स्कूल में यह खर्च 20.38 लाख रुपए पहुंच गया।
सूत्रों ने बताया कि प्राइवेट स्कूलों का परीक्षा परिणाम शासकीय स्कूलों से बेहतर रहता है। शासन द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के तमाम प्रयास किए गए लेकिन गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद के अधिकारियों का कहना है सर्वे के प्रथम चरण में राजधानी के आसपास के तीनों स्तर के स्कूलों का चयन किया गया।
सर्वे के प्रभारी आलोक शर्मा ने बताया कि यह प्रारंभिक चरण में है इसे वृहद स्तर पर किया जाएगा। जिसके बाद विभिन्न विषयों पर इसका विश्लेषण किया जाएगा। इस तथ्य को अधिकृत नहीं माना जा सकता। एससीईआरटी के संयुक्त संचालक एनपी कौशिक ने बताया कि परिषद शैक्षिक विकास के लिए अनुसंधान करती है। इसी के तहत यह शोध किया जा रहा है। इसके पूरा होने पर संचालक को सौंपी जाएगी। इसमें एक महीने का समय लगने की संभावना है।