इंदौर.
'शक्तिधाम' पर हुए कोटिचंडी महायज्ञ ने सिंहस्थ की यादें ताजा कर दीं। दस दिनों से चल रहे महायज्ञ की पूर्णाहुति पर तो नजारा सिंहस्थ के शाही स्नान की तरह था, हर तरफ लाखों श्रद्धालुओं की आस्था-श्रद्धा ही नजर आ रही थी। 'शक्ति' की परिक्रमा अलसुबह से शुरू हुई। वहीं अंत में यज्ञ की भस्म लेने के लिए भी श्रद्धालु उमड़ पड़े।
शनिवार को सुबह 7.30 बजे मंत्रोच्चार की गूंज शुरू हो गई। महायज्ञ में 5500 से ज्यादा जोड़े शामिल हुए। गणोशपूजन के साथ महायज्ञ की शुरुआत हुई। 'ओम ऐं tीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे..' के मंत्रों के बीच महायज्ञ में जोड़ों ने आहुतियां दीं। दोपहर 12.30 बजे स्थापित देवता के उत्तर पूजन के बाद बलिदान कर्म हुआ, इसमें भगवती सहित नवग्रह, क्षेत्रपाल, योगिनी, सर्वतोभद्र, वास्तुमंडल के साथ दस दिगपाल आदि देवताओं के निमित्त 'ú हुं फट्' के साथ भूरे कोले की बलि दी गई। 1.15 बजते ही प्रधानकुंड पर मुख्य यजमान लक्ष्मणसिंह गौड़ से पंडितों ने अवशिष्ट साकल्य, लाल कपड़े में लिपटा, गाय के घी से भरा खोपरे का गोला 'शुचि' में रखवाया।
पंडितों ने 'ú जयंती मंगलाकाली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते' के मंत्र के बाद 'ú पूर्णाहुत्यै नम:..' की गूंज के बीच पूर्णाहुति करवाई। शक्तिधाम में उपस्थित हर व्यक्ति ने अपनी जगह पर खड़े होकर दोनों हाथ उठाकर मां चंडी को प्रणाम किया। इसके बाद जूनापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज के सान्निध्य में महाआरती हुई। महायज्ञ में लोकनिर्माण मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल हुए। आरती पुष्पांजलि के साथ महायज्ञ का समापन हुआ और मातारानी से जाने-अंजाने में हुई गलतियों के लिए माफी मांगी।
यज्ञ की भस्म लेने की होड़..
पूर्णाहुति के बाद हवनकुंड में से भस्म लेने के लिए लोग उमड़ पड़े। हालात यह हो गए कि लोग यज्ञशाला के अंदर तक पहुंच गए। संगठन के कार्यकर्ताओं को मना किया लेकिन श्रद्धालु नहीं माने। लोगों ने थैलियां की थैलियां भस्म से भर लीं।
द्वारकापुरी निवासी जगदीशप्रसाद सोनी और दम्यंती सोनी अपने छह महीने के पोते रवि को परिक्रमा के लिए लेकर आए। बच्चे की मां आरती ने बताया रवि की जन्म से आहार नली नहीं है, एक बार ऑपरेशन हो गया, एक बार और होगा। बच्चे के दादा-दादी और मां ने छह माह के रवि को यज्ञशाला की परिक्रमा करवाई और मातारानी से बच्चे के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
दो बार पहले भी प्रयास हुए :
1969 में गुजरात के सुरेंद्रनगर में स्वामी करपात्रीजी महाराज के परमशिष्य स्वामी लक्ष्मण चैतन्य ब्रrाचारी ने कोटिचंडी महायज्ञ का आयोजन किया था। उस समय 250 कुंड भी बना लिए थे लेकिन महायज्ञ अपरिहार्य कारणों से संपन्न नहीं हो पाया। इंदौर से उसमें कई विद्वान भाग लेने गए थे। इसके बाद एक बार हरिद्वार में कोटिचंडी महायज्ञ का प्रयास हुआ लेकिन वह भी पूर्ण नहीं हो पाया।
जब तेज हवा चली और उठा महायज्ञ से धुआं
बलिकर्म के बाद करीब 12.45 बजे महायज्ञ स्थल पर जब पूर्णाहुति की तैयारियां चल रही थीं, कुछेक मिनट के लिए तेज हवाएं चलीं और यज्ञस्थल का धुआं यज्ञशाला और आसपास छा गया। जिधर देखो हवनकुंड से उठता धुआं ही दिखाई दे रहा था। इस बीच लोगों ने कहा महायज्ञ सफल हो गया।