जोधपुर. डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज से जुड़े तीनों अस्पताल संक्रमण की चपेट में हैं। संक्रमण के माहौल में मरीज और परिजन तो आहत है ही, वहां पर ड्यूटी देने वाले कर्मचारी भी किसी न किसी व्याधि से पीड़ित हैं। कई स्टाफ बुखार, गले में समस्या और हाथ, पांव में टूटन जैसी समस्या से ग्रस्त हैं।
विडंबना यह है कि इससे बचने के लिए उन्हें लगातार एंटीबायोटिक्स का सेवन करना पड़ रहा है। माइक्रोबायलॉजी विभाग की ओर से अस्पतालों मे सामान्य मापदंड से तीन से चार गुणा अधिक संक्रमण होने की रिपोर्ट और चेतावनी देने के बावजूद नतीजा सिफर है।
माइक्रोबायलॉजी विभाग की ओर से हर माह अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू, सीसीयू सहित अन्य स्थानों के सैंपल लेकर कल्चर रिपोर्ट तैयार की जाती है। गत पंद्रह माह की कल्चर रिपोर्ट में अस्पतालों मे सामान्य मापदंड से कई गुणा अधिक बैक्टीरिया पाए गए हैं।
रिपोर्ट में सुडोमुनास, एसपरजिलस फंगस, स्टेप ओरियस, ग्राम पोजिटिव बिसिलाइ, स्टेप एलबस, क्लेबसएला और माइक्रोकोकस सहित करीब एक दर्जन बैक्टीरिया पाए गए हैं। इनमें कई बैक्टीरिया इतने घातक हैं कि उनकी चपेट में आने पर मरीज की मौत भी हो सकती हैं।
ऑपरेशन थियेटर की स्थिति
ऑपरेशन थियेटर में स्टेपओरियस जैसे घातक बैक्टीरिया मिले हैं, वहीं बैक्टीरिया केयरिंग पार्टिकल (बीसीपी) क्यूबिक मीटर ऑफ एयर ढाई हजार तक पाए गए हैं। जबकि 353 तक की स्थिति को सामान्य माना गया है। वहीं न्यूरो सर्जरी ऑपरेशन थियेटर में 106 से 2016 बीसीपी प्रति क्यूबिक मीटर ऑफ एयर पाए गए हैं। जबकि 35.3 बीसीपी प्रति क्यूबिक मीटर ऑफ एयर सामान्य स्थिति होती हैं।
कहां-कैसा हाल
एमजीएच के आईसीयू, एमओ रूम, स्टाफ रूम और बर्न वार्ड में सुडोमोनास और हड्डी वार्ड में स्टेपओरियस जैसे घातक बैक्टीरिया का जमावड़ा हैं। वहीं ऑपरेशन थियेटर में एसपरजिलस फंगस बैक्टीरिया, जीपीबी, स्टेप एलबस, केलेबसएला और माइक्रोकोकस बैक्टीरिया पाए गए हैं।
फ्यूमिगेशन के बाद भी स्थिति भयावह
चार जुलाई 2007 को एमडीएम अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर, ट्रोमा आईसीयू, आईसीयू में फ्यूमिगेशन किया गया था, मगर पांच जुलाई की कल्चर रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। ऑपरेशन थियेटर मे स्टेपएलबस, जीपीबी, कलेबसएला बैक्टीरिया मिले।
ओटी नंबर दो में 849, चार में 622, पांच में 795, ऑथरेपेडिक्स ओटी में 778 और न्यूरो सर्जरी ओटी में 49.53 बीसीपी प्रति क्यूबिक मीटर संक्रमण पाया गया है। जून माह में एमजीएच के बर्न यूनिट के स्टाफ रूम और मेल वन, इमरजेंसी आईसीयू औैर वहां के एमओ रूम, आईआईसीयू में सुडोमुनास बैक्टीरिया पाया गया था। बर्न यूनिट स्टाफ रूम में बीसीपी प्रति क्यूबिक मीटर ऑफ एयर 1050 पाई गई।
>> हम समय- समय पर फ्यूमिगेशन करवाते हैं। बैक्टीरिया फैलने के कई कारण हैं। इसके लिए सफाई व्यवस्था के साथ अस्पताल स्टाफ, मरीज और उसके परिजन भी जिम्मेदार हैं।’
—डॉ. डीआर माथुर, अधीक्षक, एमजीएच
>> माइक्रोबायलॉजी विभाग से अस्पताल की स्थिति की जानकारी लूंगा और संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।’
—डॉ. केके सब्बरवाल, अधीक्षक, एमडीएम अस्पताल
>> फ्यूमिगेशन के कारण ही स्थिति को नियंत्रण मे हैं। यदि ऐसा नही होता तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती। संक्रमण फैलने का मुख्य कारण मरीज के साथ उसके परिजनों को भी एलाउ करना है। जिसके कारण बैकटीरिया फैलते हैं। इनकी रोकथाम के लिए उपाय किए जाएंगे।’
—डा. बीडी गुप्ता, उम्मेद अस्पताल अधीक्षक