अजमेर.
जनाना अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं का अपने नवजात शिशुओं के साथ जल्द घर लौटने की इच्छा पर अस्पताल प्रशासन एक बार फिर रोक लगा सकता है। वजह फिर वही, जननी सुरक्षा योजना के तहत दी जाने वाली राशि का टोटा। अस्पताल प्रशासन ने प्रसूताओं को मेडिकल रिलीफ सोसायटी के उस बजट से 5.50 लाख का भुगतान कर छुट्टी दे दी थी जिससे संविदा पर रखे कर्मचारियों को वेतन आदि भुगतान किया जाता है।
शुक्रवार को परिवार कल्याण महकमे ने योजना के तहत दी जाने वाली राशि के लिए पांच लाख का चैक जारी कर दिया। अब प्रशासन पशोपेश में है कि वह इस रकम को घर जाने को तैयार बैठी दूसरी प्रसूताओं में बांटे या फिर कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करे।जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूताओं को रोज करीब 50 हजार रुपयों का भुगतान किया जाता है।
प्रशासन ने राशि नहीं होने पर मेडिकल रिलीफ सोसायटी के कोष से रकम खर्च करने के बाद बाकी प्रसूताओं के डिस्चार्ज पर रोक लगा दी थी।‘भास्कर’ में खबर छपने के बाद विभाग से मिले 5 लाख से प्रसूताओं डिस्चार्ज कर दिया गया। दिक्कत यह है कि प्रशासन इस राशि से दूसरी प्रसूताओं को डिस्चार्ज करे या सोसायटी की खर्च की गई राशि के एवज में कर्मचारियों का वेतन चुकाए या दवाइयों आदि पर खर्च करे।
पांच लाख रुपए नाकाफी हैं। इससे ज्यादा का भुगतान तो सोसायटी से किया जा चुका है। कर्मचारियों के भुगतान के साथ ही दवाइयां या किसी और वस्तु की खरीद करने के लिए इससे ही खर्च करना पड़ेगा। ऐसे में यदि जल्द ही और राशि नहीं मिली तो फिर से विकट समस्या पैदा हो जाएगी।
-डॉ. प्रभा सिंघल, अधीक्षक, जनाना अस्पताल
पसोपेश
समाज कल्याण विभाग द्वारा भेजी गई पांच लाख की रकम से ज्यादा राशि का पहले ही भुगतान कर चुका है अस्पताल प्रशासन।
रूक सकती है पगार
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने शुक्रवार को योजना के लिए 5 लाख रुपए का चेक जारी कर दिया, जबकि इस पर साढ़े पांच लाख का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। अब अस्पताल प्रशासन की दिक्कत यह है वह इस राशि से घर जाने के लिए तैयार बैठी दूसरी प्रसूताओं में बांटे या फिर दवाइयों की खरीद और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करे।
यदि रकम प्रसूताओं में बांटी जाती है तो कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पाएगा और उन्हें तनख्वाह देता है तो उसे विभाग से दोबारा राशि आने तक प्रसूताओं के डिस्चार्ज पर रोक लगानी पड़ेगी।