भोपाल. साधु-संत भाजपा की नीतियों के खिलाफ हो गए हैं। शनिवार से गुफा मंदिर में शुरू हुए संत सम्मेलन में उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के पहले पार्टी झुनझुना देकर संतों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। वे सरकार द्वारा गठित की गई मठ मंदिर सलाहकार समिति का विरोध कर रहे हैं।
यहां आए सभी संत भाजपा पर जमकर बरसे। उनकी मांग है कि हिंदू मठ मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण नहीं होना चाहिए। यह उनकी संपत्ति नहीं है। सोहागपुर के महंत हरकिशनदास महाराज ने भाजपा पर आरोप लगाया कि यह पार्टी संतों को लालीपाप देकर समझाने का प्रयास कर रही है। संत समाज की मांग है कि हिंदू कानून के आधार पर मंदिरों पर नियंत्रण करने वाली समिति का गठन हो और इसमें वे ही सदस्य हों जिन्हें साधु-संत चुनें।
आंदोलन की चेतावनी:
गुफा मंदिर के महंत चंद्रमादास महाराज ने कहा कि समिति के सदस्यों पर विचार होना चाहिए। चुनाव के पहले इस पर सरकार अपना नियंत्रण क्यों कर रही है। बगलामुखी मंदिर के महंत रवींद्र दास ने कहा कि सरकार के खिलाफ साधु संत प्रदेश स्तरीय आंदोलन करेंगे। मंदिरों पर सरकारी हस्तक्षेप होना ही नहीं चाहिए और भाजपा मंदिरों पर शासन करना चाहती है। ऐसा तो कांग्रेस ने भी नहीं किया।
मप्र पुजारी महासंघ के पं.नरेंद्र दीक्षित ने कहा कि सरकार ने मठ मंदिर सलाहकार समिति गठित की है, उसे संत समिति गठित करना चाहिए। पं.मनमोहन शर्मा ने कहा चुनाव के समय ठीक पहले समिति का गठन मंदिरों से भाजपा की राजनीति करने की इच्छा को दर्शाता है। दतिया से आए महंत मोहनदास महाराज ने कहा कि मंदिरों पर सरकारी शिकंजा कसने की कोशिश का रही है। उन्होंने कहा कि मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त होना चाहिए। सम्मेलन में पं.जगदीश शर्मा, महंत सोमवार गिरी रामशरण शास्त्री, भगवतदास जी आदि उपस्थित थे।