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तीन विभागों में फंसी राजहंस

कोटा. शहर की बिगड़ती परिवहन व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए चलाया गया एक दर्जन राजहंस बसों का बेड़ा तीन पाटों के बीच फंसकर रह गया है। इनके संचालन के लिए कोटा सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (केसीटीसीएल) तो बनी लेकिन इसके महत्वपूर्ण तीन भागों में ही आपसी तालमेल नहीं है।

इससे बसों के लिए लिया गया बैंक का ऋण भी समय पर चुकता नहीं हो पा रहा है। राजहंस बसों की शुरूआत तत्कालीन राज्यपाल प्रतिभापाटिल व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 26 जनवरी को किया था। इसके बाद यह बसें 2 फरवरी को शहर की सड़कों पर आई थी। आरंभ निजी बस संचालकों की ओर से इसका विरोध किया गया था।

क्या है केसीटीएसएल
कोटा सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड- केसीटीसीएल। ये हैं आठ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स - जिला कलेक्टर - निदेशक, महापौर - अध्यक्ष, सीईओ नगर निगम - सीईओ, अध्यक्ष एवं सचिव यूआईटी, वरिष्ठ नगर नियोजक, एसपी सिटी एवं आरटीओ।

>> बसों के संचालन में मासिक पास जारी करने वाली एवं विज्ञापन कंपनी से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है। दोनों से करीब एक लाख 70 हजार रुपए प्रतिमाह आने थे लेकिन वह आए नहीं। बैंक में इसी कारण पिछले दो माह का ब्याज जमा नहीं हो पाया है।
अफजर मुल्तानी, अनम ट्रेवल्स, इंदौर

>> राजहंस ने गत अगस्त माह से बैंक की ऋण राशि पर लगाया गया ब्याज नहीं चुकाया है, जो बढ़कर करीब 9 लाख रुपए हो गया है। बसों की मासिक किश्त जनवरी-08 से आरंभ होगी।
बीएम घई, प्रबंधक, एसबीबीजे राजभवन मार्ग

>> विज्ञापन का काम करने वाली कंपनी यहां रुचि नहीं ले रही है। उनको प्रतिमाह 333 पास जारी करने थे लेकिन 200 पास जारी किए गए। कंपनी चाहती है कि राजहंस सेवा चलती रहे और जनता को बेहतर सेवा मिले। राजहंस को चलाने का सभी काम अनम ट्रेवल्स को करने का प्रस्ताव दिया गया था लेकिन उसने असर्मथता जता दी। अगर घाटे में चली तो ठेका वापस लेंगे।
एलएन मीणा, सीईओ, नगर निगम एवं (केसीटीसीएल)





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